हिमाचल के बाहर प्रायवेट जॉब करने वालों के बच्चों को भी MBBS की काउंसलिंग का हक

हाईकोर्ट ने कहा - लेकिन दाखिले का हक कोर्ट के फैसले पर निर्भर

हिमाचल के बाहर प्रायवेट जॉब करने वालों के बच्चों को भी MBBS की काउंसलिंग का हक

- Advertisement -

शिमला। हिमाचल के बाहर निजी सर्विस या बिजनेस कर रहे लोगों के बच्चों को MBBS की काउंसलिंग में भाग लेने का मौका तो मिलेगा, लेकिन दाखिले का हक पाने के लिए उन्हें अभी कुछ और इंतजार करना होगा। हाईकोर्ट ने शुक्रवार को साफ किया है कि राज्य से बाहर रहकर पढ़ाई करने वाले हिमाचली स्टूडेंट्स का MBBS कोर्स में दाखिला हाईकोर्ट के आगामी आदेशों पर निर्भर करेगा।


जस्टिस धर्म चंद चौधरी व जस्टिस विवेक ठाकुर की बेंच ने यह भी साफ किया कि निजी व्यवसाय वाले कर्मियों के बच्चों यानी याचिकाकर्ताओं को काउंसलिंग में भाग लेने का मौका दिया जाए। लेकिन राज्य के बाहर सरकारी नौकरी कर रहे अभिभावकों और प्रायवेट सर्विस या बिजनेस करने वाले अभिभावकों के बच्चों को दाखिले के लिए अधिकार कोर्ट के आगामी आदेशों पर निर्भर करेगा। कोर्ट ने सरकार से दोनों कैटेगरी के उन स्टूडेंट्स का भी ब्योरा मांगा है, जिन्हें 2013 से 2017 तक नियमों में छूट का लाभ मिला। मामले की अगली सुनवाई 3 जुलाई को होगी।

क्या है दो कैटेगरीज

पहली कैटेगरी वह है, जिनके अभिभावक सरकारी नौकरी में हैं या कभी रहे थे। दूसरी कैटेगरी में वे स्टूडेंट हैं, जिनके अभिभावक निजी क्षेत्र में कार्यरत हैं या कभी रहे थे। अभिभावकों की राज्य से बाहर नौकरी होने के कारण ये स्टूडेंट हिमाचल प्रदेश के किसी स्कूल से जरूरी दो कक्षाएं पास नहीं कर सके। जबकि प्रदेश के कोटे में यह नियम है कि स्टूडेंट ने कम से कम दो चुनिंदा कक्षायें हिमाचल के स्कूलों से पास की हों। हालांकि सरकार ने मौजूदा सत्र में उन स्टूडेंट्स को छूट दी है, जिनके अभिभावक सरकारी कर्मी हैं या कभी रहे हों। लेकिन निजी क्षेत्र में काम करने वाले अभिभावकों के बच्चों को इस छूट का कोई लाभ नहीं दिया गया।

भेदभाव को लेकर कोर्ट से लगाई थी गुहार

निजी क्षेत्र में काम करने वाले अभिभावकों के बच्चों ने नियमों में छूट का लाभ मांगते हुए कहा कि उनके साथ सरकार भेदभाव कर रही है। शैक्षणिक सत्र 2013-14 से लेकर 2017-18 तक दोनों तरह के स्टूडेंट्स को दाखिले में छूट दी गयी थी जबकि इस बार उन्हें यह छूट नहीं दी जा रही है। प्रार्थियों की दलील को मद्देनजर रखते कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि किस आधार पर सरकारी कर्मियों के बच्चों को दो कक्षाओं सम्बन्धी नियम से छूट दी गई और इसके पीछे सरकार क्या उद्देश्य रहा है। कोर्ट ने इसके अलावा प्रदेश से बाहर कार्यरत या सेवानिवृत कर्मियों के उन बच्चों का ब्योरा भी मांगा है, जिन्होंने इस कोर्स के लिए आवेदन कर रखा है ताकि उनको याचिकाओं में प्रतिवादी बनाया जा सके और वह कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रख सकें।

 

- Advertisement -

Facebook Join us on Facebook Twitter Join us on Twitter Instagram Join us on Instagram Youtube Join us on Youtube

RELATED NEWS

हिमाचल अभी अभी बुलेटिन

Top : News

शिमला बुक कैफ़े को निजी हाथों में सौंपने के पक्ष में नहीं जयराम सरकार

पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह "पीजीआई" क्यों किए गए रेफर, जाने पूरा मामला

सीएम जयराम बोले- कैदियों के प्रति समाज की धारणा बदलने की जरूरत

तेजस में उड़ान भरने वाले पहले रक्षा मंत्री बने राजनाथ सिंह

रेड अलर्ट : मायानगरी मुंबई में आज भारी बारिश की चेतावनी, स्कूल-कॉलेज बंद

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के CJ समेत 4 जज की हुई सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति, सोमवार को लेंगे शपथ

एचपीयू ने स्नातक प्रथम वर्ष में फेल हुए 21 हजार विद्यार्थियों को दी राहत, ले सकेंगे दाखिला

युवा कांग्रेस ने सुधीर को दी प्यार भरी सलाह,अपने "उपचुनाव" की करो तैयारी

रामलाल ठाकुर के जख्म हुए हरे, एचपीसीए को लेकर उठाए अब ये सवाल

सत्ती बोले, "सुधीर की हरकतें" बता रही हैं कांग्रेस का हाल

रिजल्ट अपग्रेड नहीं किया तो एनएसयूआई सड़कों पर करेगी आंदोलन

इस दिन होगी टैट की परीक्षाएं, शिक्षा बोर्ड ने जारी किया शैड्यूल  

पूजा के धूप से मैकेनिक की दुकान में लगी आग, दो युवक झुलसे

नाहन: अवैध कब्जों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई, तीसरे दिन भी टूटे कई आशियानें

वीरभद्र सिंह की हालत स्थिर, पूरी तरह से स्वस्थ होने में लगेंगे कुछ दिन

Download Himachal Abhi Abhi App Himachal Abhi Abhi IOS App Himachal Abhi Abhi Android App

राशिफल

Himachal Abhi Abhi E-Paper


विशेष




सब्सक्राइब करें Himachal Abhi Abhi अलर्ट
Logo - Himachal Abhi Abhi

पाएं दिनभर की बड़ी ख़बरें अपने डेस्कटॉप पर

अभी नहीं ठीक है