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#CU सहित अन्य 30 महत्वपूर्ण परियोजनाओं के निर्माण में देरी के पीछे क्या कारण- सरकार ने दिया जवाब

सरकार ने किया स्पष्ट वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के स्पष्टीकरण के चलते हो रही देरी

#CU सहित अन्य 30 महत्वपूर्ण परियोजनाओं के निर्माण में देरी के पीछे क्या कारण- सरकार ने दिया जवाब

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शिमला। कांगड़ा जिला में सेंट्रल यूनिवर्सिटी (Central University) को लेकर इन दिनों राजनीति उफान पर है। देहरा विधानसभा क्षेत्र के दौरे के दौरान मंच पर केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर (Union Minister of State for Finance Anurag Thakur) द्वारा मामले को उठाए जाने के बाद से ही मामला तूल पकड़ गया है। अनुराग ठाकुर ने कहीं ना कहीं सीयू निर्माण में देरी को लेकर प्रदेश सरकार को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। ऐसे में अब प्रदेश सरकार ने भी पूरे रिकॉर्ड के साथ सीयू निर्माण में देरी के कारण का खुलासा किया है। यही नहीं सीयू के अलावा लंबे समय ते अटके पड़े प्रोजेक्टों का भी चिट्ठा खोल दिया है। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय (Ministry of Forest and Environment) के स्पष्टीकरण के दृष्टिगत केंद्रीय विश्वविद्यालय और कई अन्य महत्त्वपूर्ण परियोजनाओं का काम शुरू करने में देरी होने की बात सरकार ने कही है।

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प्रदेश सरकार के राजस्व मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने आज यहां बताया कि भारत सरकार ने केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला के दो परिसर स्थापित करने के लिए स्वीकृति दी है, जिनमें तहसील धर्मशाला (Dharamshala) में उत्तरी परिसर जदरांगल और देहरा में दक्षिणी परिसर शामिल हैं। उन्होंने कहा कि दक्षिणी परिसर देहरा के निर्माण के लिए प्रदेश सरकार ने 34.55 हेक्टेयर सरकारी भूमि 2010 में ही केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के नाम स्थानांतरित कर दी थी, जिसका इंतकाल भी 2010 में हो गया था। उन्होंने बताया कि इसके अलावा 81.79 हेक्टेयर वन भूमि को उपयोगकर्ता एजेंसी (यूजर एजेंसी), निदेशक उच्चतर शिक्षा, हिमाचल प्रदेश के नाम वन संरक्षण अधिनियम के तहत परिवर्तित (डाईवर्जन) करने की मंजूरी 11 दिसंबर, 2018 को प्राप्त हुई थी, लेकिन इसमें यह शर्त लगाई गई थी कि जिस भूमि को परिवर्तित करने की मंजूरी प्रदान की गई है, वह किसी भी स्थिति में बिना केंद्र सरकार के अनुमोदन से किसी अन्य एजेंसी, विभाग या किसी अन्य व्यक्ति के नाम स्थानांतरित नहीं की जा सकती। ऐसी परिवर्तित वन भूमि की विधिक स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा।

इस मामले और कुछ अन्य मामलों को राजस्व विभाग के आग्रह पर वन विभाग ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार से आवश्यक स्पष्टीकरण के लिए 22 अप्रैल, 2019 को आग्रह किया था, कि क्या परिवर्तित वन भूमि को उपयोगकर्ता एजेंसी के नाम इंतकाल के माध्यम से स्थानांतरित किया जा सकता है या नहीं। राजस्व विभाग ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार से यह आग्रह भी किया था कि क्या परिवर्तित वन भूमि के कब्जे के लिए क्या कागजात माल (राजस्व अभिलेख) में इंद्राज किया जा सकता है या नहीं। इस पर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने 30 जुलाई, 2019 को पत्र के माध्यम से स्पष्ट किया था कि वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत जो वन भूमि परिवर्तित की जाती है, उसकी विधिक स्थिति वन भूमि ही रहेगी। ऐसी परिवर्तित भूमि इंतकाल के माध्यम से उपयोगकर्ता एजेंसी या उपयोगकर्ता विभाग के नाम कागजात माल में राजस्व विभाग द्वारा स्थानांतरित नहीं की जा सकती।

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वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार के स्पष्टीकरण के अनुसार केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला के साथ-साथ अन्य 30 मामलों में अभी तक भी परिवर्तित वन भूमि का इंतकाल संबंधित उपयोगकर्ता एजेंसी के नाम नहीं दिया जा सका है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार केंद्रीय विश्वविद्यालय व अन्य सभी विकासात्मक परियोजनाओं को कार्यान्वित करने के लिए वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत कार्रवाई करते हुए मंजूरी के लिए आवश्यक कदम उठा रही है, किंतु वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के स्पष्टीकरण के दृष्टिगत केंद्रीय विश्वविद्यालय और कई अन्य महत्त्वपूर्ण परियोजनाओं का काम शुरू करने में देरी हो रही है। राजस्व मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार ने वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए वन भूमि को परिवर्तित करने में त्वरित कार्रवाई की है। इसके लिए आवश्यक अनुमोदन भी 11 दिसंबर, 2018 को जारी कर दिया था तथा ग्रीन कवर प्लान के अंतर्गत पांच करोड़ 60 लाख रुपये भी नवंबर, 2018 में कैम्पा हेड में जमा करवा दिए थे। यह राशि पहले जमा की गई राशि 17 करोड़ 27 लाख 53 हजार रुपये के अतिरिक्त थी। राजस्व मंत्री (Revenue Minister) ने कहा कि प्रदेश सरकार ने इस बारे उत्पन्न स्थिति पर पुनः विचार करने के लिए यह मामला वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार से उठाया हुआ है। उन्होंने केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री से भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से इन तकनीकी कठिनाइयों का निवारण करवाने का आग्रह किया, ताकि केंद्रीय विश्वविद्यालय और लगभग 30 परियोजनाओं का निर्माण कार्य शीघ्र आरंभ कर विकास को गति दी जा सके।


केंद्रीय विश्वविद्यालय के अलावा 30 मामलों में अभी तक परिवर्तित वन भूमि का इंतकाल संबंधित यूजर एजेंसी को नहीं दिया जा सका है, जिसमें 16 दिसंबर, 2015 से जल शक्ति विभाग की उठाऊ जलापूर्ति योजना के निर्माण कार्य के लिए 4.2691 हेक्टेयर वन भूमि की परिवर्तित करने बारे, 11 दिसंबर, 2017 से जिला शिमला के वन भूमि अधिकार क्षेत्र में राजकीय महाविद्यालय चायल कोटी में और उच्चतर शिक्षा विभाग लालपानी शिमला में शिक्षा विभाग के पक्ष में 01-39-96 हेक्टेयर वन भूमि, 11 दिसंबर, 2018 से जिला कांगड़ा की केंद्रीय विश्वविद्यालय देहरा के सेटेलाइट कैंपस स्थापित करने के लिए उच्चतर शिक्षा विभाग के पक्ष में 81-79-16 हेक्टेयर भूमि, 2 सितंबर, 2006 से जिला लाहौल-स्पीति के उदयपुर में तकनीकी शिक्षा विभाग के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान के निर्माण कार्य के लिए 25-05-00 बीघा भूमि, 25 मई 2018 से जिला सोलन के मौजा अडुवाल में उद्योग विभाग के पक्ष में बायो टेक्नोलॉजी पार्क स्थापित करने के लिए 12.4239 हेक्टेयर भूमि, 14 सितंबर, 2017 से जिला शिमला के राजकीय महाविद्यालय धामी के लिए शिक्षा विभाग के पक्ष में 01-02-97 हेक्टेयर भूमि, 2 मार्च 2017 से जिला कांगड़ा के नगरोटा बगवां में वर्कशॉप स्थापित करने के लिए हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम के पक्ष में 0-90-36 हेक्टेयर भूमि परिवर्तित करने के मामले लंबित हैं। 21 फरवरी, 2012 से जिला मंडी के सुकेत वन मंडल के अधिकार क्षेत्र में तहसील सरकाघाट के पपलोग में प्रशिक्षण विद्यालय के निर्माण के लिए हिमाचल प्रदेश परिवहन निगम (HRTC) के पक्ष में 2.68 हेक्टेयर वन भूमि परिवर्तित करने के, 7 नवम्बर, 2019 से जिला सिरमौर के नाहन वन मंडल में अंधेरी (काला अंब) एमवीए उप केंद्र स्थापित करने के लिए हिमाचल पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन के पक्ष में 5.494 हेक्टेयर वन भूमि परिवर्तित करने, 5 मई 2017 से जिला कांगड़ा के बाबा बरोह बस स्टैंड निर्मित करने के लिए हिमाचल प्रदेश बस स्टैंड मेनेजमेंट एंड डवेल्पमेंट अथॉरिटी के पक्ष में 0.4608 हेक्टेयर वन भूमि परिवर्तित करने के मामले लंबित हैं।

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मै. उसाका हाइड्रो पावर लिमिटेड के पक्ष में 2.5 मेगावाट सुमन सरवरी एचईपी के निर्माण के लिए वन खंड व जिला कुल्लू के अंतर्गत 1.3554 हेक्टेयर वन भूमि को परिवर्तित करने बारे, सतलुज जल विद्युत परियोजना के पक्ष में अनिल, कोटगढ़ व रामपुर वन खण्ड जिला शिमला व कुल्लू के अधिकार क्षेत्र में लूहरी एचईपी स्टेज-एक (219 मेगावाट) के निर्माण के लिए, बिथल शिमला के लिए 98.1004 हेक्टेयर परिवर्तित वन भूमि, वन खंड व जिला कुल्लू के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत 3 मेगावाट से 4.9 मेगावाट के लिए मेसर्ज के.के.के. हाइड्रोपावर लिमिटिड के लिए 0.4795 हेक्टेयर परिवर्तित अतिरिक्त वन भूमि, कुल्लू वन खंड में 192 मेगावाट के अलियान दुहंगन जल विद्युत परियोजना के निर्माण के लिए 9.55 हेक्टेयर परिवर्तित अतिरिक्त वन भूमि, हिमाचल प्रदेश में मेसर्ज राजस्थान स्पिनिंग एंड विविंग मिल्ज लिमिटेड के लिए अलियान दुहंगन जल विद्युत परियोजना के निर्माण के लिए 37.629 हेक्टेयर परिवर्तित वन भूमि, कुल्लू जिला में बड़ाग्राम लघु जल विद्युत परियोजना के निर्माण के लिए 1.4236 हेक्टेयर परिवर्तित वन भूमि, पावर्ती वन खण्ड जिला कुल्लू के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत पुलगा गांव में 2 मेगावाट की चकसी मिनी जल विद्युत परियोजना के निर्माण के लिए मेसर्ज पूरी ऑयल मिल्स लिमिटेड के लिए 1.69 हेक्टेयर परिवर्तित वन भूमि, वन खंड जिला कुल्लू के अधिकार क्षेत्र में 1.5 मेगावाट क्षमता की हरिपुर नाला लघु जल विद्युत परियोजना के निर्माण के लिए 0.9583 हेक्टेयर परिवर्तित वन भूमि, कुल्लू वन खंड के अधिकार क्षेत्र में 4.8 मेगावाट की लघु जल विद्युत परियोजना एलियो-2 के निर्माण के लिए मेसर्ज एलियो मनाली हाइड्रोपावर लिमिटेड के लिए 2.2020 हेक्टेयर परिवर्तित वन भूमि, पावर्ती वन खंड जिला कुल्लू के अधिकार क्षेत्र में ब्रह्म गंगा जल विद्युत परियोजना मनीकरण के लिए 1.9547 हेक्टेयर परिवर्तित वन भूमि, पावर्ती वन खंड शमशी जिला कुल्लू के अधिकार क्षेत्र में 5 मेगावाट बलारघु लघु जल विद्युत परियोजना के निर्माण के लिए मेसर्ज संध्या हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बलारघु प्राइवेट लिमिटेड को 4.1119 हेक्टेयर परिवर्तित वन भूमि, निचार तहसील जिला किन्नौर के युला खास उरनी गांव, उप-मुहाल कुटानो में पट्टे पर रोरा जल विद्युत परियोजना के निर्माण के लिए 0-03-25 और 0-09-72 हेक्टेयर सरकारी भूमि को पट्टे पर देने के लिए निवेदन, मै0 गुम्मा हाईड्रो प्रोजेक्ट स्टेज-प्प्प् के पक्ष में 1 मैगावाट की स्मॉल लघु जल विद्युत परियोजना स्थापित करने हेतु तहसील चिड़गांव, जिला शिमला में सरकारी वन भूमि कुल रकवा 0-79-66 हेक्टेयर को पट्टे पर प्रदान करने बारे, मै0 लियुंड हाईड्रो पावर प्राईवेट लिमिटेड के पक्ष में 2.00 मैगावाट की लघु जल विद्युत परियोजना स्थापित करने हेतु तहसील धर्मशाला, जिला कांगड़ा में सरकारी वन भूमि कुल रकवा 3-97-11 हेक्टेयर को पट्टे पर प्रदान करने बारे, मै0 पिनाकल हाईड्रो एनर्जी प्राईवेट लिमिटेड के पक्ष में 2.00 मैगावाट की लघु जल विद्युत परियोजना स्थापित करने हेतु तहसील मनाली, जिला कुल्लू में सरकारी वन भूमि कुल रकवा 01-93-67 हेक्टेयर को पट्टे पर प्रदान करने बारे, नेशनल थर्मल पावर कोरपोरेशन लिमिटेड के पक्ष में कोल बांघ जल विद्युत परियोजना की स्थापना हेतु तहसील सुन्नी, जिला शिमला में सरकारी वन भूमि कुल रकवा 18-53-46 हेक्टेयर को पट्टे पर प्रदान करने बारे, मै0 जे0 एस0 डब्ल्यू, एनर्जी लिमिटेड के पक्ष में 240 मैगावाट की कुठेहड़ लघु जल विद्युत परियोजना स्थापित करने हेतु तहसील भरमौर, जिला चंबा में सरकारी वन भूमि कुल रकवा 679-04-12 बीघा (61-40-83 हेक्टेयर) को पट्टे पर प्रदान करने बारे, मै0 न्यू धौलाधार टैकनो पॉवर प्राइवेट पालमपुर, जिला कांगड़ा के पक्ष में 1 मेगावाट लघु जलविद्युत परियोजना स्थापित करने हेतु पट्टे पर वन भूमि परिवर्तित करने बारे, जिला किन्नौर के तहसील निचार, गांव युलाखास में रौरा जलविद्युत परियोजना के निर्माण के लिए 0-03-25 और 0-09-72 हेक्टेयर सरकारी भूमि पट्टे पर परिवर्तित करने बारे, मै0 एडी हाईड्रो पॉवर लिमिटिड के पक्ष में प्रीणी से पनारसा/बनाला तक 220 के.वी. ट्रांसमिशन लाइन बिछाने के लिए 64.3258 हेक्टेयर वन भूमि परिवर्तित करने बारे और जिला व तहसील कुल्लू के पाठी हलान-1 में 0-95-83 हेक्टेयर वन भूमि को पट्टे पर परिवर्तित करने बारे मामले सम्मिलित हैं।

 

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