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Birthday Sepcial : दो साल की उम्र में Dalai Lama बन गए थे तेनजिन, वर्षों बाद समझा महामहिम होने का मतलब

Birthday Sepcial : दो साल की उम्र में Dalai Lama बन गए थे तेनजिन, वर्षों बाद समझा महामहिम होने का मतलब

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मैक्लोडगंज। वह तिब्बतियों के धर्मप्रमुख ही नहीं, विश्व शांति के दूत भी हैं। आधी सदी से ज्यादा समय से वह निर्वासन में हैं। बेशक वह चीन की आंखों में खटकते हैं लेकिन उनका व्यक्तित्व ऐसा है कि सामने पड़ जाएं तो मन में असीम श्रद्धा व सम्मान की भावना उमड़ने लगती है। जी हां, बात हो रही है दलाई लामा की जिनका आज 85 वां जन्मदिन (85th Birthday) है। खास बात यह है कि 14वें दलाई लामा तेनजिन ग्यात्सो (Tenjin Gyatso), महामहिम होने का मतलब लंबे समय बाद समझ पाए थे। तेनजिन ग्यात्सो को जिस समय दलाई लामा (Dalai Lama) के तौर पर मान्यता मिली थी, उस वक्त वे मात्र दो वर्ष के थे।

 

 

कुंबुम मठ (Kumbum Math) में अभिषेक के बाद उन्हें माता-पिता का ज्यादा साथ नहीं मिल पाया। कारण सीधा था ल्हासा से दस किमी दूर उतर-पूर्वी दिशा में पैदा हुआ दो वर्षीय बालक लहामो चेढप दलाई लामा बन चुका था। उसकी शिक्षा-दीक्षा उसी अनुरूप होनी थी। महामहिम ने स्वयं एक किताब में लिखा है कि एक छोटे बच्चे के लिए मां-बाप से इस तरह अलग रहना सचमुच बहुत कठिन होता है। उस वक्त तो उन्हें यह भी पता नहीं था कि दलाई लामा होने का मतलब क्या है। उन्हें सिर्फ यही पता था कि मैं दूसरे कई छोटे बच्चों की तरह एक छोटा बच्चा था। बचपन में उन्हें एक खास शौक था कि वह एक झोले में कुछ चीजें डालकर उन्हें कंधे पर लटका लेते थे व ऐसा नाटक करते थे कि कि एक लंबी यात्रा पर जा रहे हैं। अक्सर कहा करते थे कि वे ल्हासा जा रहे हैं। दलाई लामा खाने की मेज पर हमेशा जिद करते थे कि मुझे सबसे प्रमुख स्थान पर बिठाया जाए।

 

 

15वें साल में राजनीतिक जिम्मेदारियों का निर्वाह

दलाई लामा केवल 15 वर्ष के थे तो उन्होंने अपनी सरकार के वरिष्ठ होने के नाते राजनीतिक जिम्मेदारियों का निर्वाह शुरू कर दिया था। वर्ष 1954 में महामहिम चीनी नेताओं से बातचीत करने चीन की राजधानी बीजिंग गए,जब चीन (China) तिब्बत के बारे में असहयोगपूर्ण रवैया अपनाए हुए था। वर्ष 1956 में वे महात्मा बुद्व की 2500वीं वर्षगांठ पर भारत आए व तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से तिब्बत (Tibet) की दुर्दशा पर लंबी बातचीत की। अंततः तिब्बत में चीन सरकार के बढ़ते आतंक से उत्पन्न खतरे को भांपकर उन्हें 1959 में तिब्बत छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।

 

 

नया अनुभव होगा इस मर्तबा

दलाई लामा कार्यालय का कहना है कि धर्मगुरु के 85 वें जन्मदिन (85th birthday) पर किसी भी प्रकार के भव्य समारोहों का आयोजन नहीं किया जाएगा। कार्यालय ने आम जनता से आग्रह किया गया है कि वे अपने-अपने घरों में रहकर पूजा.पाठ करें। बड़ी संख्या में लोगों का एक जगह इकट्ठा होना कोरोना वायरस (Coronavirus) के इस दौर में किसी खतरे से कम नहीं है। धर्मगुरु का जन्मदिन कैलेंडर वर्ष में तिब्बतियों और उनके दूसरे अनुयायियों के लिए सबसे खास दिनों में से एक है। यह तिब्बतियों के लिए एक आधिकारिक अवकाश का दिन होता है और वे दुनिया भर में ग्रैंड सेलिब्रेशन का आयोजन करते हैं, लेकिन इस वर्ष दलाई लामा का जन्मदिन उनके अनुयायियों के लिए एक नया अनुभव होगा।

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