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हिमाचल की नदियों से ही नहीं, पहाड़ों में भी पैदा की जा सकती है बिजली-जानिए कैसे

हिमाचल की नदियों से ही नहीं, पहाड़ों में भी पैदा की जा सकती है बिजली-जानिए कैसे

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सुंदरनगर। हाल ही में राजा रामन्ना प्रगत प्रौद्योगिकी केंद्र (RRCAT) मध्य प्रदेश के इंदौर के मैग्रेट टेक्नोलॉजी डिवीजन (Magret technology division Indor) से बतौर हेड सेवानिवृत्त हुए डॉ. आरएस शिंदे सोमवार को एमएलएसएम कॉलेज सुंदरनगर (MLSM College Sundernagar) पहुंचे। जहां पर कॉलेज प्रशासन की तरफ डॉ.आरएस शिंदे का स्वागत किया गया। उन्होंने मैग्लेव टेक्नोलॉजी के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हिमाचल में विशेषकर मंडी जिला में शिकारी, कमरूनाग और कई टॉप हिल्स पर हवा का बहाव काफी है।

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ऐसे में पहाड़ों में क्लीन एनर्जी के तहत विंड मैग्लेव मिल से बिजली (electricity) पैदा कर कई गांव बिजली से रोशन हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि अक्सर थोड़ी सी बारिश आने पर बिजली पानी का बंद होना आम है, जबकि यह तूफान और बारिश में बिजली पैदा करता है। उन्होंने कहा कि हिमाचल में कई ऐसी जगह है, जहां पर दो पहाड़ (Hill) आपस में मिलते हैं। जिन्हें गलू कहा जाता है। यही गलू विंड मैग्लेव मिल के लिए हजारों मैगावाट बिजली पैदा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर प्रदेश सरकार सहयोग करे तो वह प्रदेश में विंड मैग्लेव मिल से बिजली पैदा करने में सहयोग देने के लिए तैयार है।

 

 

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फिजिक्स विभाग के प्रमुख डॉ. विवेक वैद्य ने बताया कि सुंदरनगर के विज्ञान के छात्रों को मैग्लेव टेक्नोलॉजी के बारे में जानकारी देने के लिए डॉ. शिंदे को बुलाया गया था। इस मौके पर डॉ. शिंदे ने देश की पहली मैग्लेव टेक्नोलॉजी से बनी सुपर कंडक्टर ट्रेन के माडल के बारे में विस्तार से प्रोजेक्टर के जरिए जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत के पास स्वदेशी तकनीक के जरिए  600 किलो मीटर प्रतिघंटा से चलने वाली मैग्लेव ट्रेन का मॉडल (Maglev Train Model)  तैयार हो चुका है। उन्होंने कहा कि जिसका हाल ही में राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन भी हो चुका है। इइस मौके पर कॉलेज के फिजिक्स विभाग के छात्र छात्राओं ने डा. शिंदे से सवाल जवाब भी किए। सभी प्राध्यापकों के साथ डॉ. शिंदे ने पूरे कॉलेज कैंपस का भी जायजा लिया।

 

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