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हिमाचल: अंडरवर्ल्ड के तर्ज पर खत्म होंगे नशे से जुड़े अपराध, लागू होगा मकोका कानून

हिमाचल: अंडरवर्ल्ड के तर्ज पर खत्म होंगे नशे से जुड़े अपराध, लागू होगा मकोका कानून

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लेखराज धरटा / शिमला। मकोका (Maharashtra Control of Organized Crime) कानून को हिमाचल (Himachal Pradesh) में लाने के लिए जयराम सरकार (Jai Ram Govt) विचार कर रही है। हालांकि प्रदेश सरकार ने पिछले साल एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) 1985 में संशोंधन कर एक विधेयक पारित किया था, जिसे मंजूरी के लिए देश के राष्ट्रपति को भेजा गया। लेकिन अभी तक मंजूरी नहीं मिल पाई। बिल की मंजूरी के लिए प्रदेश सरकार ने केंद्र से आग्रह किया है। मौजूदा समय में यह कानून महाराष्ट्र और दिल्ली में लागू है। सबसे पहले महाराष्ट्र सरकार ने 1999 में मकोका (महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम) एक्ट बनाया था। इसका मुख्य मकसद संगठित और अंडरवर्ल्ड अपराध को खत्म करना था। वर्ष 2002 में दिल्ली सरकार ने भी इसे लागू कर दिया। अब राज्य सरकार महाराष्ट्र में लागू ठोस कानून का अध्ययन कर उसे हिमाचल में भी लागू करेगी।

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इस कानून के तहत संगठित अपराध जैसे अंडरवल्र्ड से जुड़े अपराधी, जबरन वसूली, फिरौती के लिए अपहरण हत्या या हत्या की कोशिश, धमकी, उगाही सहित ऐसा कोई भी गैरकानूनी काम जिससे बड़े पैमाने पर पैसे बनाए जाते हैं, मामले शामिल हैं। बताया गया कि मकोका लागू होने के बाद आरोपियों को आसानी से जमानत नहीं मिलती है। प्रदेश सरकार ने पिछले साल विधानसभा शीत सत्र के दौरान इस विधेयक को पारित किया था। जिसे प्रदेश के राज्यपाल की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति को भेजा गया, लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिली। ऐसे में जब तक राष्ट्रपति से मंजूरी नहीं मिलती तब तक प्रदेश में यह संशोधित कानून लागू नहीं हो सकता। प्रदेश की जयराम सरकार ने सत्ता में आते ही नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए इस कानून में संशोधन करने की कवायद शुरू कर दी।


मकोका के तहत हो सकती है 10 साल की सजा

बताया गया कि नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोटॉपिक सबस्टेंस यानी एनडीपीएस एक्ट-1985 में संशोधन कर नशे को रोकने के लिए कड़े प्रावधानों के साथ अधिनियमित किया गया है। जिसमें अपराधी को न्यूनतम 10 साल के कारावास की सजा का प्रावधान है और जिसे 20 साल तक बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ-साथ एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा है, जिसे दो लाख रूपये तक बढ़ाया जा सकता है। राज्य सरकार ने नशा तस्करी को गैर-जमानती अपराध बनाने के लिए एनडीपीएस एक्ट-1985 में संशोधन कर विधेयक पारित किया था।

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