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ट्रिब्यूनल बंद करने के मसले पर जयराम से मिले वकील, सीएम ने दिया यह जवाब

ट्रिब्यूनल बंद करने के मसले पर जयराम से मिले वकील, सीएम ने दिया यह जवाब

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शिमला। जयराम सरकार द्वारा प्रशासनिक ट्रिब्यूनल को बंद करने के फैसले का विरोध कर रहे वकीलों के लिए अच्छी खबर नहीं है। सीएम जयराम ठाकुर ने दो टूक कह दिया है कि सरकार ने यह फैसला जन भावनाओं के मद्देनजर रखकर लिया है। यह वापस नहीं होगा। बता दें कि प्रशासनिक ट्रिब्यूनल बंद करने के फैसले को वापस लेने की मांग को लेकर हिमाचल प्रदेश ट्रिब्यूनल बार एसोसिएशन (Tribunal Bar Association delegation) का एक प्रतिनिधिमंडल आज सीएम जयराम ठाकुर (CM Jai Ram Thakur) से मिला। सीएम जयराम ठाकुर से फैसला वापस लेने की मांग की। लेकिन, सीएम जयराम ठाकुर के जवाब के बाद ट्रिब्यूनल बंद करने के फैसले का विरोध कर रहे वकीलों की यह आस भी खत्म हो गई है।

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कल कोर्ट कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेंगे प्रदेशभर के वकील

वहीं, राज्य सरकार द्वारा प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल को बंद किए जाने के फैसले के विरोध में पूरे प्रदेश भर में वकील 25 जुलाई को अदालती कामकाज से अलग रहेंगे। हिमाचल प्रदेश ट्रिब्यूनल बार एसोसिएशन के सदस्यों के आह्वान पर पूरे प्रदेश के वकील (lawyer) राज्य सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं और अपना रोष जताने के लिए सभी वकील पूरे प्रदेश भर में कोर्ट कार्यवाही में भाग नहीं लेंगे। वहीं, प्रदेश ट्रिब्यूनल को बंद करने के प्रस्तावित निर्णय के खिलाफ वकीलों ने विरोध प्रदर्शन आज भी जारी रखा।

सरकार के इस फैसले के खिलाफ जमकर नारे लगाए गए। वकीलों की 31 सदस्यीय एक्शन कमेटी ने प्रदेश की सभी बार एसोसिएशन (Bar Asociation) से संपर्क साधने के पश्चात 25 जुलाई के लिए प्रदेश भर में विरोध दर्ज करने का आग्रह किया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि सरकार का फैसला गलत व एक तरफा है। ट्रिब्यूनल को केवल ट्रांसफर के मामलों पारित स्थगन आदेशों की एवज में बंद करना पूरी तरह से राज्य सरकार के तानाशाही रवैये को दर्शाता है। वकीलों का कहना है कि ट्रिब्यूनल में स्थगन आदेश कानून के सिद्धान्तों के मुताबिक ही होते हैं।

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सरकार का हर ट्रांसफर आर्डर किसी एमएलए के डीओ नोट या सिफारिश पर आधारित होता है और कानून इस तरह के ट्रांसफ़र आर्डर को मान्यता नहीं देता है। हरियाणा की बीजेपी सरकार हमारे प्रदेश के ट्रिब्यूनल की तर्ज पर हरियाणा में प्रशासनिक ट्रिब्यूनल खोलने का निर्णय ले रही है। जबकि हमारी सरकार इसे बंद करने पर तुली है। ट्रिब्यूनल से मिले आंकड़ों के अनुसार अब तक ट्रिब्यूनल ने ट्रिब्यूनल के पुनर्गठन के पश्चात फरवरी 2015 से अब तक लगभग 24 हजार के लगभग मामलों का निपटारा कर दिया है।

जबकि 34000 के लगभग मामले दायर हुए। केवल 11 हजार के लगभग मामले लंबित पड़े हैं। हाईकोर्ट (High court) से आए 6600 के लगभग मामलों में से 2000 के लगभग मामलों का निपटारा कर लिया गया है। कई मामलों में सुनवाई खंडपीठ न होने की वजह से नहीं हो रही है। क्योंकि लंबे समय से प्रशासनिक सदस्यों के पद रिक्त पड़े हैं। दो नामों की सिफारिश के बावजूद सरकार ने उन्हें नियुक्ति देने के बारे में नहीं सोचा।

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