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कारगिल विजय दिवस विशेषः जरा याद करो कुर्बानी

कारगिल युद्ध की कहानी, ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर की जुबानी

कारगिल विजय दिवस विशेषः जरा याद करो कुर्बानी

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मंडी। 26 जुलाई, 1999 को जिस कारगिल चोटी पर भारतीय सेना ने अपना तिरंगा लहराया था उस चोटी को फतह करने में 527 वीरों ने अपने प्राणों की आहूति दी थी। इस युद्ध में 1367 से ज्यादा वीर घायल हुए थे। मंडी जिला के द्रंग विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाले नगवाईं गांव निवासी ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर को कारगिल युद्ध का हीरो कहा जाता है, क्योंकि इनके नेतृत्व वाली 18 ग्रेनेडियर ने टाइगर हिल और तोलोलिंग पर विजयी पताका फहराया और उपरांत इसके कारगिल युद्ध की जीत का रास्ता तैयार किया। 18 ग्रेनेडियर को ही सबसे ज्यादा 52 वीरता पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं। रिटायर ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर आज भी कारगिल युद्ध की यादों को भूला नहीं पाए हैं। इस युद्ध के साथ यूं तो कई किस्से जुड़े हुए हैं लेकिन कुछ किस्से ऐसे हैं जो ब्रिगेडियर साहब के जहन में आज भी ताजा हैं।


घटना जून 1999 की है जब तोलोलिंग पर विजय हासिल करने की लड़ाई चल रही थी और सफलता मिलने के बजाय 25 जवानों की शहादत हो चुकी थी। मेजर राजेश अधिकारी भी इसमें शहीद हो चुके थे। ऐसे में ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर ने खुद मोर्चा संभालने का निर्णय लिया। उनके साथ कर्नल विश्वनाथन ने भी जाने की ठान ली। लेकिन कर्नल विश्वनाथन युद्ध के दौरान बूरी तरह से घायल हो गए और उनका शरीर एकांत स्थान पर रह गया। आसमान से सफेद आफत के रूप में बर्फबारी और जमीन पर सीना चीर देने वाली गोलियों की बौछारें हो रही थी। ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर के अनुसार जैसे-तैसे कर्नल विश्वनाथन के घायल शरीर को एक पत्थर के नीचे लाया गया। उन्होंने कर्नल के हाथ-पैरों को खूब सहलाया और यह ढांढस बंधाते रहे कि सबकुछ ठीक हो जाएगा। कर्नल विश्वनाथन का सिर ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर की गोद में था और देखते ही देखते कर्नल इस दुनिया को छोड़कर शहादत का जाम पी गए।

शव के साथ वापस लौट गया मेजर राजेश अधिकारी का खत

वहीं इससे पहले इसी कमान के मेजर राजेश अधिकारी भी शहादत का जाम पी चुके थे। मेजर राजेश अधिकारी की एक वर्ष पहले ही शादी हुई थी। शाम के समय युद्ध क्षेत्र के पास मेजर राजेश अधिकारी के घर से आया हुआ खत पहुंचा। लेकिन मेजर राजेश अधिकारी ने खत पढ़ने से यह कहकर मना कर दिया कि पहले दुश्मनों को निपटा आता हूं और खत सुबह पढ़ लूंगा। रात भर युद्ध में डटे रहने के बाद तोलोलिंग पर मेजर राजेश अधिकारी और उनकी टीम ने कब्जा तो जमा लिया लेकिन खत पढ़ने के लिए वह जीवित न रह सके। ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर बताते हैं कि जब मेजर राजेश अधिकारी के शव को उनके घर भेजा गया तो उसके साथ वह खत भी वैसे ही भेज दिया गया जैसे आया था।

ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर ने जिस 18 ग्रनेडियर का नेतृत्व किया उसमें 900 जवान थे। इनकी कमान के 34 जवान शहीद हुए और सबसे ज्यादा 52 वीरता पुरस्कार भी इनकी कमान को ही मिले थे। इसमें 1 परमवीर चक्र, 2 महावीर चक्र, 6 वीरचक्र और 18 सेना मेडल सहित अन्य सैन्य सम्मान भी शामिल थे। खुद ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर युद्ध सेवा मेडल जैसे सम्मान से सम्मानित हो चुके हैं।

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