बंबर के भंवर जाल में एक बार फिर उलझे सुरेश चंदेल, इस बार भी टूटा टिकट का सपना !

गृह जिला बिलासपुर में ही विरोध के चलते रुकी कांग्रेस में एंट्री

बंबर के भंवर जाल में एक बार फिर उलझे सुरेश चंदेल, इस बार भी टूटा टिकट का सपना !

- Advertisement -

बिलासपुर। हमीरपुर संसदीय सीट पर कांग्रेस टिकट की जुगाड़ में चर्चा में बने रहे पूर्व सांसद सुरेश चंदेल (Suresh chandel) एक बार फिर बिलासपुर जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक बंबर ठाकुर (Bumber thakur) के भंवरजाल में फंस गए हैं। अपने ही गृह जिला में कांग्रेस के विरोध के कारण सुरेश चंदेल की एंट्री अब तक नहीं हो पाई है।

 

यह भी पढ़ें   :   बीजेपी ने चुनाव आयोग से बंगाल को अति संवेदनशील घोषित करने की मांग रखी

 

जिला कांग्रेस अध्यक्ष बंबर ठाकुर सहित बिलासपुर (Bilaspur) जिला के अनेक सीनियर कांग्रेसी सुरेश चंदेल के कांग्रेस में आकर टिकट झटकने की हसरतों को सिरे नहीं चढ़ने दे रहे हैं। यही कारण है कि हमीरपुर संसदीय सीट से सुरेश चंदेल की कांग्रेस उम्मीदवारी का चैप्टर लगभग क्लोज़ हो चुका है। 2012 में विधानसभा चुनाव में बिलासपुर सीट से एक बार सुरेश चंदेल को पटखनी दे चुके बंबर ठाकुर वर्तमान में ज़िला कांग्रेस अध्यक्ष हैं। यह लगभग असंभव दिख रहा था कि बंबर ठाकुर के जिला कांग्रेस अध्यक्ष होते सुरेश चंदेल सीनियर कांग्रेसियों के सिर पर आकर बैठ जाए।

 

बंबर ठाकुर स्वयं उम्मीदवारी के दावेदार 
गौरतलब है कि ज़िला कांग्रेस अध्यक्ष बंबर ठाकुर ने स्वयं हमीरपुर संसदीय सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर आवेदन किया हुआ है। वह इस बारे गंभीरता से फील्ड में उतर कर बिलासपुर, हमीरपुर, ऊना, देहरा और धर्मपुर क्षेत्रों में लोगों के बीच जा चुके हैं। ऐसे में बीजेपी (BJP) से पूर्व में तीन बार जीते सांसद सुरेश चंदेल की कांग्रेस में आकर टिकट झटकने की मंशा को पूरा न होने देने में बंबर ठाकुर अब तक तो सफल रहे हैं। इस अभियान में उन्हें राम लाल ठाकुर और राजेश धर्मानी का भी पूरा सहयोग मिल रहा है। बड़े कांग्रेसी नेता हरगिज़ यह नहीं चाहेंगे कि बीजेपी से आकर कोई नेता उनके ऊपर आदेश चलाना शुरू कर दे। बंबर ठाकुर ने बताया कि कांग्रेस में एंट्री के लिए सुरेश चंदेल का ज़िला कांग्रेस कमेटी के पास कोई आवेदन नहीं आया है। उन्होंने यह भी कहा कि हमीरपुर संसदीय सीट पर इस बार मूल कांग्रेसी को ही टिकट मिलेगा  बाहरी उम्मीदवार हरगिज़ स्वीकार्य नहीं होगा।

 

बिलासपुर ज़िला कांग्रेस के विरोध के चलते अब तक सुरेश चंदेल की टिकट तो दूर कांग्रेस (Congress) में एंट्री तक न हो पाई है। क़ाबिलेग़ौर है कि बीजेपी के पूर्व सांसद सुरेश चंदेल ने हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ने की बात कहकर लोकसभा चुनाव की सियासत में नई जंग छेड़ दी थी। सुरेश चंदेल ने यह नहीं कहा कि वह बीजपी कब छोड़ रहे हैं और कौन सी पार्टी की टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे। यह अवश्य कहा कि राजनीति में सभी विकल्प खुले हैं। कांग्रेस में शामिल होने की बात पर चंदेल ने कहा कि राजनीतिक क्षेत्र में रहने वाले सभी से चर्चा हुई है और कांग्रेसी नेताओं से भी चर्चा हुई है, लेकिन कांग्रेस में शामिल होने के बारे में अभी निर्णय नहीं लिया है।

 

अनुराग के मुक़ाबले राणा और नरेंद्र ठाकुर भी लड़ चुके चुनाव 
हमीरपुर संसदीय क्षेत्र बीजेपी का गढ़ माना जाता है और गत 20 वर्ष से अधिक समय से हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में बीजेपी का ही कब्जा है, लेकिन देखा जाए तो गत दो लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपने संगठन से जुड़े नेता को टिकट न देकर बीजेपी से दलबदल कर कांग्रेस में आए नेता को ही अपना उम्मीदवार बनाया है। 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी से कांग्रेस में आए नरेंद्र ठाकुर को अपना उम्मीदवार बनाया था, जो बीजेपी प्रत्याशी अनुराग ठाकुर से 73 हजार वोटों से पराजित हुए थे। इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने निर्दलीय विधायक राजेन्द्र राणा को अपना प्रत्याशी बनाया जो अनुराग ठाकुर से लगभग 1 लाख वोटों से पराजित हुए। राणा भी निर्दलीय विधायक बनने से पहले बीजेपीके नेता रहे हैं।

 

 

कौन है सुरेश चंदेल 
बीजेपी के सीनियर नेता सुरेश चंदेल हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से तीन बार सांसद रहे हैं। वह 1998 से 2006 तक लगातार तीन बार चुनाव जीतकर सांसद रहे लेकिन 2006 में रिश्वत कांड में नाम आने की कारण उनकी संसद सदस्यता समाप्त हो गई थी। इसके बाद हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में हुए उपचुनाव में प्रेम कुमार धूमल सांसद बने। इसके बाद हुए लोकसभा के चुनाव में पार्टी ने प्रेम कुमार धूमल के पुत्र अनुराग ठाकुर को अपना प्रत्याशी बनाया। अनुराग ठाकुर भी लगातार तीन बार से लोकसभा चुनाव जीतते आ रहे हैं। आगामी लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी के प्रत्याशी के रूप में अनुराग ठाकुर ही मैदान में रहेंगे। रिश्वत कांड में फंसे सुरेश चंदेल की सदस्यता समाप्त होने के बाद वह लंबे समय तक राजनीतिक वनवास में रहे। इसके बाद बीजेपी के संगठन से जुड़कर काम करते रहे। वह बीजेपी के साथ-साथ बीजेपी के अन्य सहयोगी संगठनों में भी सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।
बंबर ठाकुर के हाथों सुरेश चंदेल हार चुके विधानसभा चुनाव 
बीजेपी संगठन में कार्य करते हुए सुरेश चंदेल फिर राजनीति की मुख्यधारा में आए और बीजेपी ने 2012 के विधानसभा चुनाव में बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र से टिकट दिया लेकिन वह बंबर ठाकुर से चुनाव हार गए। अपने सियासी भविष्य के संवारने के लिए चंदेल में बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र में पांच साल जमकर काम किया लेकिन 2017 में विधानसभा चुनाव के समय चंदेल को टिकट न देकर सुभाष ठाकुर को टिकट दे दिया गया। इसके बाद से सुरेश चंदेल नाराज रहे। सरकार बनने के बाद उम्मीद थी कि चंदेल को सरकार में कहीं एडजस्ट किया जाएगा लेकिन ऐसा भी नहीं हो सका। इससे नाराज चंदेल अपने समर्थकों के साथ राजनीत की नई राह तलाश कर रहे हैं। दो नावों में सवार सुरेश चंदेल को अनुराग के होते बीजेपी में तो लोकसभा टिकट मिलना संभव ही नहीं है, लेकिन मज़बूत बिलासपुर कांग्रेस ने इनकी कांग्रेस में एंट्री की राहें भी बंद कर दी हैं। अपने ही गृह ज़िला में सुरेश चंदेल को लेकर उठे विरोध के स्वर कांग्रेस के दिल्ली दरबार में भी असर दिखा गए हैं।

हिमाचल अभी अभी की मोबाइल एप अपडेट करने के लिए यहां क्लिक करें

- Advertisement -

Facebook Join us on Facebook Twitter Join us on Twitter Google+ Join us on Google+ Instagram Join us on Instagram Youtube Join us on Youtube

RELATED NEWS

हिमाचल अभी अभी बुलेटिन

Download Himachal Abhi Abhi App Himachal Abhi Abhi IOS App Himachal Abhi Abhi Android App

राशिफल

टेक्नोलॉजी / गैजेट्स / ऑटो

Himachal Abhi Abhi E-Paper



सब्सक्राइब करें Himachal Abhi Abhi अलर्ट
Logo - Himachal Abhi Abhi

पाएं दिनभर की बड़ी ख़बरें अपने डेस्कटॉप पर

अभी नहीं ठीक है