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PBR पर दो महीने का कोर्स शुरू, हिमाचल के 12 छात्र लेंगे प्रशिक्षण

PBR पर दो महीने का कोर्स शुरू, हिमाचल के 12 छात्र लेंगे प्रशिक्षण

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शिमला। हिमाचल एनविस हब हिम्कोस्ट शिमला ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा प्रायोजित ग्रीन स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम के तहत पीपल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर (PBR) पर दो महीने की अवधि का कोर्स शुरू किया। प्रधानमंत्री के कौशल भारत मिशन के अनुरूप एमओईएफसीसी ने पर्यावरण और वन क्षेत्र में कौशल विकास के लिए हरित कौशल विकास कार्यक्रम (जीएसडीपी) के माध्यम से यह पहल की है, जिससे भारत के युवाओं को रोजगार या स्वरोजगार प्राप्त करने के लिए सक्षम बनाया जा सके।

उद्घाटन समारोह के मुख्यातिथि हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान (एचएफआरआईए) शिमला के निदेशक डॉ. एसएस सामंत थे। कार्यक्रम के दौरान डॉ. प्रभारी अधिकारी एनबीपीजीआर मोहर सिंह, संयुक्त सदस्य सचिव सनी शर्मा, डॉ. अपर्णा शर्मा और एनविस हब के कर्मचारी भी उपस्थित थे। प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए 15 छात्रों का चयन किया गया है। इसमें हिमाचल से 12, चंडीगढ़ से 1, जम्मू-कश्मीर से 1 और लद्दाख से 1 शामिल हैं।

उद्घाटन समारोह में बोलते हुए डॉ. एसएस सामंत ने जैव विविधता, अपशिष्ट प्रबंधन पर एक संक्षिप्त नोट दिया। कहा कि हमें स्थानीय लोगों द्वारा उपयोग किए जाने वाले सभी स्वदेशी संसाधनों के प्रलेखन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इससे इनके संरक्षण के प्रयासों में मदद मिलेगी। डॉ. मोहर सिंह ने बताया कि NBPGR दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा जीन बैंक है। उन्होंने कहा कि पीपल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर (पीबीआर) की तैयारी आज की जरूरत है और विभिन्न स्वदेशी संसाधनों को टैग, प्रलेखित, संरक्षित और संरक्षित किया जाना चाहिए।

सनी शर्मा ने कहा कि हम इस जीएसडीपी पाठ्यक्रम के माध्यम से पैरा टैक्सोनोमिस्ट बना सकते हैं और वे स्थानीय जैव विविधता और इसके पंजीकरण तथा संरक्षण में योगदान कर सकते हैं। पाठ्यक्रम पूरा होने पर विशेषज्ञों द्वारा मूल्यांकन और वाईवा के आधार पर प्रमाण पत्र दिए जाएंगे।

एचपी एनविस हब समन्वयक डॉ. अपर्णा शर्मा ने बताया कि जीएसडीपी पाठ्यक्रमए एमओईएफसीसी द्वारा 2017-18 शुरू किए गए थे और 2018-19 में हिमाचल प्रदेश में लॉन्च किए गए थे। अब तक दो कोर्स पूरे हो चुके हैं। 2018 में पैराटैक्सोनोमी पर सर्टिफिकेट कोर्स तथा 2019 में एचपी वन विभाग के UNDP-GOI-GEF प्रोजेक्ट SECURE HIMALAYA के तहत ट्रेनिंग कोर्स करवाए गए हैं। जंगली मौनपालन एवं प्रसंस्करण और औषधीय पौधों पर मंत्रालय द्वारा दो और पाठ्यक्रम अनुमोदित किए गए हैं, जो जल्द ही शुरू किए जाएंगे।

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