शिमला से मेरठ शिफ्ट नहीं होगा आरट्रैक , रक्षा मंत्री ने धूमल को पत्र लिख किया स्पष्ट

प्रेम कुमार धूमल के पत्र का जवाब देकर राजनाथ ने चर्चाओं पर लगाया विराम

शिमला से मेरठ शिफ्ट नहीं होगा आरट्रैक , रक्षा मंत्री ने धूमल को पत्र लिख किया स्पष्ट

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हमीरपुर। आर्मी ट्रेनिंग कमांड ( आरट्रैक) हैडक्वार्टर शिमला से मेरठ स्थानातंरित करने की चर्चाओं पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ( Defence Minister Rajnath Singh)ने विराम लगा दिया है। पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल( Former CM Prem Kumar Dhumal) के पत्र का जबाव देते हुए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि इस तरह का कोई भी प्रपोजल मंत्रालय के पास नहीं आया है। यह केवल भ्रम की बात है। इसलिए आरट्रैक को शिमला से मेरठ में स्थानांतरित करने की बात झूठी है।



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पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि कुछ समय पहले इस बात की चर्चा सामने आई थी कि आरट्रैक ( ARTRAC)को मेरठ शिफ्ट किया जाना है। जिस पर उन्होंने केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को 21 जून को पत्र लिख कर सारी बात बताई थी। जिसके बाद 31 जुलाई को रक्षा मंत्रालय ( Ministry of Defence)की ओर से जबाव आया है, जिसमें ऐसी कोई भी कार्रवाई न करने की बात कही गई है।

धूमल ने केन्द्रीय मंत्री राजनाथ सिंह का आभार जताते हुए कहा कि 21 जून को लिखे गए पत्र का जवाब जल्द देने के बाद सारी स्थिति साफ हो गई है और आरट्रैक को शिमला से मेरठ नहीं बदला जाएगा। इससे पहले कांग्रेस के नेताओं ने भी आरट्रैक को शिमला से मेरठ शिफ्ट न करने के लिए रक्षा मंत्रालय से आग्रह किया था। हिमाचल कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा था। आज राठौर के राजनीतिक सचिव हरि कृष्ण हिमराल ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उस बयान का स्वागत किया है


आरट्रैक का इतिहास

आरट्रैक का गठन एक अक्टूबर 1991 को किया गया था। उस समय इसकी स्थापना मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के महू में की गई थी। 31 मार्च, 1993 को इसे शिमला शिफ्ट कर दिया, तबसे वर्तमान तक आरट्रैक शिमला में ही कार्य कर रहा है। इसका मुख्य कार्य जवानों की ट्रेनिंग को अधिक प्रभावशाली बनाना और सेना प्रशिक्षण और युद्ध से जुड़ी विभिन्न नीतियां बनाना है। आरट्रैक की स्थापना से पहले इस ऐतिहासिक भवन में 1864 से 1939 तक भारतीय सेना का मुख्यालय रहा।

प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध (First and Second World War) के दौरान सभी ऑपरेशनों की योजना और संचालन यहीं से हुआ। 1947 में स्वतंत्रता के बाद भारतीय सेना की पश्चिमी कमान बनाई गई और उसका मुख्यालय 1954 से 1985 तक यहीं रहा। 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्धों की योजना और संचालन यहीं से हुआ।

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