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मौसम के बिगड़े मिजाज कहीं सेब पर न पड़ जाए भारी

मौसम के बिगड़े मिजाज कहीं सेब पर न पड़ जाए भारी

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लोकिन्दर बेक्टा/ शिमला। हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी की रीढ़ सेब की फसल पर इस बार भी संकट के बादल छा गए हैं। इस बार मौसम के प्रतिकूल रहने से सेब की फसल पर नकारात्मक असर दिख रहा है। बारिश न होने और तूफान आने और ओलावृष्टि से निचले इलाकों से लेकर ऊंचाई तक के इलाकों में सेब की फसल पर असर पड़ा है। निचले इलाकों में तो सूखे की जैसी स्थिति बन रही है। इसका कारण बारिश का न होना है। ऐसे में इस बार पिछले वर्ष की तुलना में कम फसल का अनुमान लगाया जा रहा है।

  • पिछले वर्ष से कम हो सकता है इस बार सेब उत्पादन

इस बार सर्दी के मौसम में भी मौसम ज्यादा नहीं बरसा। इस बार बर्फ के स्पैल कम रहने से जमीन में नमी कम रही थी और इसके बाद बारिश का क्रम भी कम रहा। वैसे इस बार मार्च माह में बारिश का स्पैल ज्यादा रहा, लेकिन उसका भी लाभ नहीं मिल रहा है। आजकल बारिश की ज्यादा जरूरत है और यह इक्का-दुक्का स्थानों पर ही हो रही है और इससे सेब की फसल प्रभावित हो रही है। इसके साथ-साथ जहां बारिश नहीं हो रही, वहां तूफान आकर फसल को खराब कर रहा है। साथ ही ओलावृष्टि से रही-सही कसर पूरी हो रही है। इससे सेब बागान निराश हो गया है।

राज्य की 4 हजार करोड़ रूपए की आर्थिकी पर छाया संकट

राज्य में सेब आधारित अर्थव्यवस्था करीब 4 हजार करोड़ रूपए की है और इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप में लाखों लोगों का रोजगार जुड़ा है। हिमाचल में 1 लाख हैक्टयर से ज्यादा क्षेत्र में सेब की पैदावार होती है और इतने भारी इलाकों में सेब के पौधे लगने से कितने लोगों का रोजगार जुड़ा है, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। सेब की फसल कम होने से बागवानों से लेकर इससे जुड़े कारोबारियों और अन्य रोजगार करने वालों के नुकसान होगा।

इस वर्ष उत्पादन सिमट सकता है दो करोड़ पेटियों तक

बागवानी विभाग के मुताबिक इस बार सेब के उत्पादन का आंकड़ा 2 करोड़ पेटियों तक सिमट सकता है। मौसम की मार के चलते यह उत्पादन इतना गिर सकता है। उधर, पिछले वर्ष राज्य में सेब की 2.34 करोड़ पेटियों का उत्पादन हुआ था। राज्य में यूं तो सेब का उत्पादन 10 जिलों में होता है, लेकिन सबसे जयादा उत्पादन शिमला जिला में होता है। कुल उत्पादन का करीब 65 फीसदी उत्पादन इसी जिला से होता है, लेकिन इस बार शिमला जिले के अधिकतर इलाकों में सेब के बागीचों में कम फसल है। इसका असर फ्लावरिंग से ही दिखने लगा था, लेकिन बाद में बारिश न होने और तूफान आने से इसमें और गिरावट आ रही है। शिमला जिला के कोटगढ़, रोहड़ू, कोटखाई, जुब्बल, नारकंडा, रामपुर और चौपाल क्षेत्र में सेब की फसल कम ही बताई जा रही है। ऐसे में इस बार फसल का आंकड़ा गिरने की संभावना है। शिमला के साथ-साथ कुल्लू, मंडी और अन्य जिलों में भी सेब की फसल पर यह प्रभाव देखा जा सकता है। कुल मिलाकर इसका असर उत्पादन पर होगा। प्रदेश के बागवानी विभाग के अधिकारियों के मुताबिक अभी तक फील्ड से जो रिपोर्ट आ रही है, उसके मुताबिक सेब उत्पादन में इस बार गिरावट आएगी।

रिपोर्ट बनाने को कहा है कितना होगा उत्पादनः बवेजा

उधर, बागवानी विभाग के निदेशक डॉ. एचएस बवेजा कहते हैं कि इस बार मौसम के प्रतिकूल रहने से सेब की फसल पर असर पड़ा है। सेब उत्पादक कई क्षेत्रों से सेब की फसल के कम उत्पादन का अनुमान है। उनका कहना था कि विभाग ने सभी फील्ड स्टॉफ को अपने-अपने क्षेत्रों से सेब की रिपोर्ट तैयार कर भेजने को कहा है। उन्होंने कहा कि विभाग के पास 10 जून तक सेब के उत्पादन की रिपोर्ट आ जाएगी और फिर अनुमान लगाया जा सकता है कि इस बार कितना सेब उत्पादन होगा।

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