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Illegal Possession : कब्जाधारियों को राहत देने के मामले की सुनवाई अब 25 को

Illegal Possession : कब्जाधारियों को राहत देने के मामले की सुनवाई अब 25 को

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Illegal Possession : शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में राज्य सरकार द्वारा सरकारी और वन भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों को राहत देने के लिए बनाए गए प्रारूप नियमों के प्रकाशन की इजाजत मांगने को दायर आवेदन पर सुनवाई 25 अप्रैल के लिए टल गई। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने सरकार के आवेदन पर संबंधित पक्षकारों को दो सप्ताह के भीतर आपत्तियां दर्ज करने के आदेश जारी किए। सरकार ने इस आवेदन के साथ भू-राजस्व अधिनियम के तहत बनाए गए उन प्रारूप नियमों की प्रति भी पेश की, जिसके तहत उक्त अतिक्रमणकारियों को राहत देने के नियम बनाए गए हैं। सरकार ने छोटे, गरीब व भूमिहीन किसानों द्वारा किए गए अवैध अतिक्रमण को मालिकाना हक में तबदील करने हेतु इन प्रारूप नियमों के राजपत्र में प्रकाशन की इजाजत मांगी है।

प्रारूप नियमों का राजपत्र में प्रकाशन जरूरी

सरकार का कहना है कि इन प्रारूप नियमों का राजपत्र में प्रकाशन जरूरी है, ताकि इन्हें अंतिम रूप देने से पहले संबंधित लोगों अथवा संस्थाओं से आपत्तियां आमंत्रित की जा सके। सरकार की ओर से पेश प्रारूप के अनुसार शहरों में 2 बिस्वा तक कब्जाई गई भूमि और ग्रामीण इलाकों में अधिकतम 5 बीघा तक कब्जाई गई भूमि का मालिकाना हक दिए जाने का प्रस्ताव है।


यह मालिकाना हक एसडीएम अथवा सहायक सेटलमेंट अधिकारी द्वारा दिया जाएगा। यह मालिकाना हक 28 अगस्त 2015 से पहले के पात्र कब्जाधारियों को दिया जाना है।  प्रारूप के अनुसार ग्रामीण इलाकों के कब्जाधारियों की कुल भूमि अवैध कब्जा मिलाकर 10 बीघा से अधिक नहीं होनी चाहिए। प्रारूप में स्पष्ट किया गया है ग्रामीणों के आम उद्देश्य के लिए इस्तेमाल होने वाली भूमि जैसे सड़क, जंगल, मेले के आयोजनों के लिए मैदान, चरागाह, अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए इस्तेमाल होने वाले मैदान, आम रास्ते, कब्रिस्तान, श्मशान घाट, तालाब, नहर, कूहल व चैक डैम इत्यादि पर किए गए कब्जों का मालिकाना हक किसी भी सूरत में नहीं दिया जाएगा। जिस वन भूमि के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी की जरूरत होगी वह केंद्र सरकार से मांगी जाएगी।

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