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शिमला में बच्चों को खेलने का मैदान नहीं, चीफ जस्टिस को लिख दिया पत्र, फिर जो हुआ पढ़ें

शिमला में बच्चों को खेलने का मैदान नहीं, चीफ जस्टिस को लिख दिया पत्र, फिर जो हुआ पढ़ें

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शिमला। शहर में बच्चों के लिए खेल मैदान ( sports ground) ना होने के मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ( Himachal Pradesh High Court) ने कड़ा संज्ञान लिया है। नाभा कालोनी के बच्चों ने चीफ जस्टिस के नाम लिखे पत्र पर न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी और न्यायाधीश ज्योत्सना रेवाल दुआ की खंडपीठ ने संज्ञान लेते हुए प्रधान सचिव समाजिक न्याय एवं अधिकारिता, डीसी शिमला, नगर निगम आयुक्त को नोटिस (Notice) जारी कर जवाब तलब किया है।



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पत्र में आरोप लगाया गया है कि शिमला शहर भीड़ वाला शहर हो गया है और अधिक से अधिक भवनों का निर्माण किया जा रहा है जिससे बच्चों को सड़कों के किनारे खेलने के लिए मजबूर होना पड़ता है जोकि किसी बड़े हादसे को न्योता देने का कारण हो सकता है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि नाभा में बच्चों के खेलने के लिए खेल मैदान नहीं है और हाल ही में ब्लॉक 34 को गिरा दिया गया है, लेकिन राज्य सरकार (State Government) इस खाली मैदान पर तीन चार भवनों को बनाने जा रही है। पत्र के माध्यम से कोर्ट से गुहार लगाईं गई है कि इस जमीन पर खेल का मैदान बनाया जाए, ताकि उसमे बच्चे खेल सकें। बच्चे देश का भविष्य है और उन्हें स्वच्छ वातावरण में खेलने का अधिकार भी है, खेल बच्चों को स्वस्थ रखता है और उनके शरीर की कसरत भी होती है। हाईकोर्ट ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए उक्त आदेश पारित किए।

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