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हिमाचल निजी बस ऑपरेटरों की मांग, 53 कैंसिल रूट परमिट को फिर से करें बहाल

हिमाचल हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए सरकार बनाएं नीति

हिमाचल निजी बस ऑपरेटरों की मांग, 53 कैंसिल रूट परमिट को फिर से करें बहाल

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शिमला। हिमाचल निजी बस ऑपरेटर संघ (Himachal Private Bus Operator Association) ने सरकार से मांग की है कि जिन 53 रूट परमिट को कैंसिल (Bus route permit) किया गया था। उन्हें फिर से बहाल किया जाए। संघ ने सरकार ने कहा कि उच्च न्यायालय (High Court) के आदेश के बावजूद उन्होंने रूट परमिट को कैंसिल किया था। जो परिवहन विभाग (Transport Ministry) की गलती थी। जिसका खामियाजा वे भुगत रहे हैं।

हिमाचल निजी बस ऑपरेटर संघ अध्यक्ष  राजेश पराशर  ने कहा कि  यह सही है कि जो 53 परमिट रद्द किए गए हैं। वह मोटर वाहन अधिनियम के तहत नहीं आते थे, लेकिन जब निजी बस ऑपरेटरों ने रूट परमिट के संशोधन के लिए आवेदन दिया था। उस पर क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण को सोच समझ कर फैसला लेना चाहिए था, अब जबकि रूट परमिट को संशोधित हुए लगभग 3 वर्ष हो चुके हैं।

‘पुराने रूट की समय सारिणी पर नहीं चल सकते’

राजेश ने कहा कि निजी बस ऑपरेटरों ने बैंक (Bank) से लोन (Loan) लेकर की नई बसें खरीदी हैं। कोरोना काल (Corona Period) के दौरान वह बसें भी सही रूप से अपने रूट पर नहीं चल पाईं। इन बसों के जरिए भी कमाई नहीं हो सकी है। अब निजी बस ऑपरेटरों को माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के कारण अपने पुराने रूट परमिट पर चलने का फरमान क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी द्वारा जारी किया गया है। जिसमें कहा गया है कि वह 1 सितंबर से अपने पुराने रूट परमिट पर चलें। नहीं तो कार्रवाई की जाएगी, जबकि यह वर्तमान दौर में संभव नहीं है। क्योंकि जिसे रूट पर वह पहले चलते थे, वह समय सारणी (Time Table) किसी और ऑपरेटर या फिर एचआरटीसी को दे दी गई है।

निजी ऑपरेटरों के साथ दोहरे मापदंड

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा निजी बस ऑपरेटर के प्रति हमेशा ही दोहरे मापदंड अपनाए जाते हैं। जबकि 24 किलोमीटर का पैमाना निजी बस ऑपरेटरों पर ही लागू नहीं होता है, जबकि एचआरटीसी पर भी 24 किलोमीटर का पैमाना अपनाया जाना चाहिए। सरकारी बस संचालन को लेकर उन्होंने कहा कि शिमला शहर में भी एचआरटीसी को बहुत ज्यादा परमिट दिए गए हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि शिमला शहर में परमिट पर रोक लगाई गई है। यह नियम और कानून मात्र निजी बस ऑपरेटर पर ही लागू होते है, जबकि एचआरटीसी को धड़ल्ले से परमिट दिए जा रहे हैं। इसलिए विभाग में दोहरे मापदंड न अपनाए। परिवहन विभाग को चाहिए कि जो 53 निजी बस ऑपरेटर उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद प्रभावित हुए हैं, उनके लिए कोई रणनीति बनाए। ताकि उनको भी अपने पुराने रुट पर ना जाना पड़े।

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