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चंडीगढ़ में शराब सस्ती, हिमाचल को लग रहा चूना-जानिए कैसे

चंडीगढ़ में शराब सस्ती, हिमाचल को लग रहा चूना-जानिए कैसे

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शिमला। चंडीगढ़ में सस्ती शराब से हिमाचल को चूना लग रहा है। यहां तक की हिमाचल के खजाने पर भी मार पड़ रही है। हिमाचल में सैर सपाटा करने आने वाले पर्यटक दो बोतल शराब चंडीगढ़ से खरीदकर ले आते हैं और हिमाचल के वादियों में मौज मस्ती कर लौट जाते हैं। हिमाचल की पहाड़ियों पर सिर्फ शराब की खाली बोतल बिखरी मिलती हैं। आलम यह है कि चंडीगढ़ में शराब सस्ती होने की वजह से हिमाचल को हर साल करीब 200 करोड़ के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। नुकसान की वजह से आबकारी एवं कराधान विभाग का शराब से राजस्व जुटाने का आंकड़ा भी गड़बड़ रहा है। बेशक साल 2018 में विभाग ने 1425 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 1480 करोड़ का राजस्व जुटाया हो, मगर इस साल अब तक करीब 1625 सौ करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले विभाग के खाते में सिर्फ 950 करोड़ की रकम ही आई है।

 


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बता दें कि शराब की बिक्री के अलावा जीएसटी से होने वाली आय ही प्रदेश सरकार की आमदन का प्रमुख साधन है। जीएसटी राजस्व में तो प्रदेश में बढ़ोतरी हो रही है, मगर शराब की बिक्री से वांछित आमदन नहीं हो रही है। गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में चंडीगढ़ में विगत में आयोजित उत्तर क्षेत्र परिषद की बैठक में भी सस्ती शराब का मुद्दा गूंजा। मगर चंडीगढ़ ने शराब सस्ती नहीं की। केंद्र शासित प्रदेश होने के नाते केंद्र से चंडीगढ़ को भरपूर आर्थिक मदद मिलती है। लिहाजा राज्य सरकार चाहती है कि चंडीगढ़ शराब सस्ती करे। इसी मकसद से प्रदेश सरकार की तरफ से केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक को लिखे पत्र में शराब के प्रति बोतल दाम और आबकारी शुल्क कम वसूले जाने पर आपत्ति जताई गई है। प्रधान सचिव आबकारी एवं कराधान संजय कुंडू की तरफ से लिखे गए 3 पृष्ठ के पत्र में इस मामले को लेकर आपत्ति जताई गई है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश में बिकने वाली शराब की एक बोतल के दाम में 140 रुपए से 595 रुपए तक का अंतर है। इतना ही नहीं शराब पर लगने वाला आबकारी शुल्क भी प्रदेश के मुकाबले 11 रुपए से लेकर 14 रुपए कम है। इस कारण सीमावर्ती क्षेत्र में अवैध कारोबार के अलावा यहां घूमने आने वाले कई सैलानी भी प्रदेश की बजाए चंडीगढ़ से ही शराब साथ लेकर आते हैं। शराब के दाम में इतने बढ़े अंतर को देखते हुए प्रदेश सरकार हरकत में आई गई है। पत्र में यह भी कहा गया है कि गत 20 सितंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में चंडीगढ़ में हुई नार्थ जोन काउंसिल की बैठक में यह मामला उठाया गया था, लेकिन उसके बावजूद भी स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। सीएम जयराम ठाकुर के प्रधान सचिव व आबकारी एवं कराधान विभाग के सचिव संजय कुंडू का कहना है कि चंडीगढ़ के प्रशासक से यह मामला उठाया गया है। उन्होंने कहा कि शराब के दाम में अंतर होने से इसके अवैध कारोबार को बढ़ावा मिलने के अलावा प्रदेश के राजस्व को भी नुकसान हो रहा है।

 

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शराब के प्रमुख 6 ब्रांडों के दाम में अंतर में 140 रुपए से 595 रुपए का अंतर है। ब्लेंडर प्राइड चंडीगढ़ में 600 रुपए तथा हिमाचल प्रदेश में 815 रुपए का अंतर है। इसके अलावा रॉयल स्टैग दाम 430 रुपए की अपेक्षा 570 रुपए, मैकडोल शराब नंबर-1 दाम 320 रुपए की अपेक्षा 510 रुपए, 100 पाइपर दाम 1,100 रुपए की अपेक्षा 1,695 रुपए, जॉनी वॉकर 2,200 की अपेक्षा 3,450 और चिवास रीगल 2,200 रुपए की अपेक्षा 3,400 रुपए का अंतर है।

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