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हिमाचल विधानसभा ने खत्म किए एक साथ 20 कानून , दो बिल ध्वनिमत से पारित

हिमाचल विधानसभा ने खत्म किए एक साथ 20 कानून , दो बिल ध्वनिमत से पारित

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शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने आज दो बिल ध्वनिमत से पारित कर दिए। इनमें हिमाचल प्रदेश निरसन विधेयक 2019 और हिमाचल प्रदेश अधिवक्ता कल्याण निधि संशोधन विधेयक 2019 शामिल हैं। दोनों ही विधेयक शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने बीते कल सदन में पेश किए थे, जिन पर आज चर्चा हुई। हिमाचल प्रदेश निरसन विधेयक 2019 पर हुई चर्चा में हिस्सा लेते हुए माकपा विधायक राकेश सिंघा ने एक ही बार में 20 विधेयकों को खत्म कर देने पर आपत्ति जताई और कहा कि सरकार को बिना चर्चा के यह कदम नहीं उठाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि सरकार जिन कानूनों को खत्म करने जा रही है, उनका आज भी औचित्य है। सिंघा की दलील थी कि सरकार इन कानूनों को खत्म करके ताकतवर को और ताकतवर बना रही है।


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कांग्रेस के सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने जानना चाहा कि सरकार जिन कानूनों को खत्म करने जा रही है, क्या उनके स्थान पर कोई और कानून आया है। वहीं आशा कुमारी ने कहा कि सदन को यह जानने का अधिकार है कि पुराने कानून को क्यों खत्म किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इन कानूनों को खत्म करने से पहले सलेक्ट कमेटी को विचार के लिए भेजा जाना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने भी इस विधेयक का विरोध किया और कहा कि सदस्यों को इस विधेयक को लेकर शंकाएं हैं और ऐसे में सरकार को जल्दबाजी करने के बजाय इसे सलेक्ट कमेटी को भेजना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मामला वैसा ही है, जैसे पर्यटन विकास निगम के 16 होटल विस्तृत अध्ययन करने के बाद वेबसाइट पर बिक्री के लिए चढ़ा दिए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केंद्र सरकार को खुश करने के लिए 20 कानून एक साथ खत्म करने जा रही है, लेकिन यह तानाशाही है।

विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों पर सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि यदि विपक्ष इस विधेयक पर सच में गंभीर है तो उसे लिखित में संशोधन देने चाहिए थे। उन्होंने दावा किया कि विधि विभाग ने गहन अध्ययन के बाद इन कानूनों को खत्म करने का निर्णय लिया है, क्योंकि अब ये कानून व्यवहारिक नहीं रह गए हैं। शिक्षा मंत्री ने विपक्ष की दलीलों पर कहा कि इन कानूनों की उपयोगित खत्म हो गई है। इसलिए इन्हें खत्म किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इन कानूनों के स्थान पर केंद्र सरकार के नए कानून आ गए हैं। इसलिए पुराने कानूनों को खत्म किया जा रहा है। विपक्ष के विरोध के बीच सदन ने इस विधेयक को बाद में ध्वनिमत से पारित कर दिया।

हिमाचल प्रदेश अधिवक्ता कल्याण निधि संशोधन विधेयक 2019 भी सदन में पारित हुआ। कांग्रेस के सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस विधेयक पर हुई चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि इस विधेयक में मुंशी के कल्याण का भी प्रावधान होना चाहिए और तब तक इसे सलेक्ट कमेटी को भेज देना चाहिए, क्योंकि मुंशी ही अधिवक्ताओं की रीढ़ है। शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने विपक्ष की दलील पर कहा कि बार काउंसिल आफ इंडिया का एक ट्रस्ट बना हुआ है और यह सिर्फ अधिवक्ताओं का ही है, जिसे कानूनी रूप भी दिया गया है। उन्होंने कहा कि विधेयक में प्रस्तावित विधेयक भी ट्रस्ट की मंशा के अनुसार है, इसलिए इसे पास कर देना चाहिए।

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