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गुप्ताजी आज सुबह-सुबह पेपर पढ़ रहे थे….

गुप्ताजी आज सुबह-सुबह पेपर पढ़ रहे थे….

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बेटा अपने पिता वर्मा जी से पूछ रहा था…

पिता जी आपने यह बेशुमार दौलत कैसे कमाई?
वर्मा जी ने कहा : शादी के बाद शुरू-शुरू के दिनों की बात थी।
मेरे पास सिर्फ 50 रु. थे। मैंने उन रुपयों से कुछ सेब खरीदे और बेच दिए।
अगले दिन मैंने दोबारा वही किया और ऐसा कई दिनों तक चलता रहा। काफी मेहनत की।
बेटा : अच्छा फिर?
वर्मा जी : फिर मेरे ससुर की मौत हो गई और बस, उनकी सारी जायदाद हमें मिल गई।

 

 

 

 

 

 

 

रात को कमरे का ताला खराब हो गया था…

बीबी ने टार्च मुझे थमाई और खुद ताला खोलने में लग गई
काफी समय गुजर गया लेकिन ताला खुलने का नाम ही नहीं ले रहा था
बीबी का पारा सातवें आसमान को छूने लगा।
फिर उसने टार्च पकड़ ली और मुझे कहा कि तुम कोशिश करो।
मैंने कोशिश की और ताला झट से खुल गया।
बीबी मुझ पर बरस पड़ी और कहने लगी
अब पता चला?? टार्च कैसे पकड़ते हैं… .

कोई नहीं जीत सकता अपनी WIFE से…

 

 

 

 

 

 

मोहित – मैं स्कूल नहीं जाऊंगा…!

मां – क्यों बेटा? क्या पढ़ाई में मन नहीं लगता..?
.
मोहित – नहीं मां, ये बात नहीं है…
.
मां – फिर क्या बात है..?
.
मोहित – मास्टर जी को तो कुछ आता जाता है नहीं,
हर सवाल का जवाब मुझसे पूछते हैं…!!!

 

 

 

 

 

 

 

 

सोमू एक दर्जी के पास गया…

सोमू – पैंट की सिलाई कितनी है…?
.
दर्जी – 200 रुपये…
.
सोमू – और निक्कर की…?
.
दर्जी – 50 रुपये…
.
सोमू (कुछ देर सोचकर) – तो फिर निक्कर ही सिल दो,
बस लंबाई पैरों तक कर देना…!!!

 

 

 

 

 

 

 

पप्पू उदास बैठा था…

गप्पू – क्या हुआ, उदास क्यों बैठा है?
.
पप्पू – क्या बताऊं यार, किसी ने कहा कि पेड़ से हमें ‘शीतल छाया’ मिलती है…

मैं यहां पेड़ के नीचे तीन दिन से बैठा हूं, लेकिन न तो शीतल आई और न छाया…!!!

 

 

 

 

 

 

गुप्ताजी आज सुबह-सुबह पेपर पढ़ रहे थे….

जिसमें एक बहुत सुन्दर साड़ी का फोटो था और लिखा हुआ था-
‘इस खूबसूरत साड़ी को आज ही खरीदिए और पूरे 50% बचाइए।’
गुप्ताजी ने इधर-उधर देखा और पूरा पन्ना फाड़ दिया
और पूरे 100% बचा लिए।

 

 

 

 

 

 

 

चार सरदार ट्रेन के पीछे भाग रहे थे…

दो चढ़ गए, तो ट्रेन में लोगों ने कहा –

‘वेल डन’

.
सरदार – क्या खाक ‘वेल डन’

जाना तो उन्हें था, हम तो छोड़ने आए थे…!!!

 

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