Covid-19 Update

1,42,510
मामले (हिमाचल)
1,04,355
मरीज ठीक हुए
2039
मौत
23,340,938
मामले (भारत)
160,334,125
मामले (दुनिया)
×

हिंदुओं की पवित्र नदी गंगा

हिंदुओं की पवित्र नदी गंगा

- Advertisement -

गंगा, हिंदुओं की सबसे पवित्र नदी है। इसके किनारे मैदानी इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए यह जीवन का आधार भी है। सच तो यह है कि गंगा घाटी दुनिया की और किसी भी नदी घाटी क्षेत्र की अपेक्षा अधिक जनसंख्या वाला क्षेत्र है।ganga-2


वेदों, पुराणों और रामायण एवं महाभारत जैसे महाकाव्यों में गंगा नदी का व्यापक उल्लेख मिलता है।एक पौराणिक कथा के अनुसार गंगा हिमवान की पुत्री और उमा की बहन है। देवताओं को खुश करने के लिए इन्द्र् गंगा को स्वर्ग ले गए। कहा जाता है कि राजा सागर ने खुद को अधिक शक्तिशाली बनाने के लिए अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया। इस खबर से देवराज इन्द्र को चिन्ता सताने लगी कि कहीं उनका सिंहासन न छिन जाए। इन्द्र ने यज्ञ के अश्व को चुराकर कपिल मुनि के आश्रम के एक पेड़ से बांध दिया। जब सागर को अश्वं नहीं मिला तो उसने अपने 60 हजार बेटों को उसकी खोज में भेजा। उन्हेंल कपिल मुनि के आश्रम में वह अश्व मिला। यह मानकर कि कपिल मुनि ने ही उनके घोड़े को चुराया है, वो पेड़ से घोड़े को छुड़ाते हुए शोर कर रहे थे। उनके शोरगुल से मुनि के ध्यान में बाधा उत्पन्न हो रही थी। और जब उन्हें पता चला कि ये यह सोच रहे हैं कि मैने घोड़ा चुराया है तो वे अत्यंत क्रोधित हुए। उनकी क्रोधाग्नि वाली एक दृष्टि से ही वे सारे राख के ढेर में तबदील हो गए।


वे सारे अन्तिम संस्कारों की धार्मिक क्रिया के बिना ही राख में बदल गए थे। इसलिए वे प्रेत के रूप में भटकने लगेकई पीढि़यों बाद सागर के कुल के भगीरथ ने हजारों सालों तक कठोर तपस्या की। तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा ने गंगा को धरती पर उतारने की भगीरथ की मनोकामना पूरी कर दी। गंगा बहुत ही उद्दंड और शक्तिशाली नदी थी। वे यह तय करके स्वर्ग से उतरीं कि वे अपने प्रचण्ड वेग से धरती पर उतरेंगी और रास्ते में आने वाली सभी चीजों को बहा देंगी। शिव को गंगा के इस इरादे का अंदाजा था इसीलिए उन्हों ने गंगा को अपनी जटाओं में कैद कर लिया।ganga-1

भागीरथ ने तब शिव को मनाया और फिर उन्होंने गंगा को धीरे-धीरे अपनी जटाओं से आजाद किया। और तब गंगा भगीरथी के नाम से धरती पर आईं। उन राख के ढेरों से गुजरते हुए गंगा ने जहनुमुनि के आश्रम को डूबो दिया। गुस्से में आकर मुनि ने गंगा को लील लिया। एक बार फिर भगीरथ को मुनि से गंगा को मुक्त करने हेतु प्रार्थना करनी पड़ी। इस तरह गंगा बाहर आईं और अब वो जाह्नवी कहलाईं।

गंगा हमेशा से ही प्रथम पूज्य देवी के रूप में सम्मान पाती रही हैं। उनके धरती पर आने का कारण चाहे जो भी रहा हो – कोई श्राप या किसी दुखी इंसान की याचना। उनका रूप सदा ही दैवीय रहा है । कहा जाता है कि गंगा की धारा स्वर्ग, नर्क और धरती तीनों लोक में जाती है।

- Advertisement -

Facebook Join us on Facebook Twitter Join us on Twitter Instagram Join us on Instagram Youtube Join us on Youtube

हिमाचल अभी अभी बुलेटिन

Download Himachal Abhi Abhi App Himachal Abhi Abhi IOS App Himachal Abhi Abhi Android App

टेक्नोलॉजी / गैजेट्स / ऑटो

Himachal Abhi Abhi E-Paper


विशेष




सब्सक्राइब करें Himachal Abhi Abhi अलर्ट
Logo - Himachal Abhi Abhi

पाएं दिनभर की बड़ी ख़बरें अपने डेस्कटॉप पर

अभी नहीं ठीक है