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Chamba मिंजर का समापन, अखंड चंडी महल से निकली शोभायात्रा

Chamba मिंजर का समापन, अखंड चंडी महल से निकली शोभायात्रा

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चंबा। हिमाचल के जिला चंबा (Chamba) की ऐतिहासिक मिंजर (Minjar) रविवार को रावी नदी में मिंजर विसर्जन के साथ संपन्न हो गई। अखंड चंडी महल जिसमें वर्तमान में राजकीय मेडिकल कॉलेज चंबा संचालित है के परिसर से चंबा के विधायक पवन नैयर की अगुवाई में शोभा यात्रा निकाली गई, जो चल कर रावी नदी के किनारे मंजरी गार्डन पहुंची। यहां पर मिंजर विसर्जन के साथ मिंजर का समापन भी हो गया। इस मौके पर पारंपरिक कूंजड़ी मल्हार गायन प्रस्तुत किया गया। शारीरिक दूरी, मास्क और सैनिटाइजर के उपयोग के साथ शोभा यात्रा पूरी हुई।

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समापन समारोह के इस मौके पर विशेष तौर से डीसी (DC Chamba) विवेक भाटिया भी मौजूद रहे। पुलिस अधीक्षक डॉ. मोनिका, नगर परिषद अध्यक्ष नीलम नैयर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रमन शर्मा, एसडीएम चंबा शिवम प्रताप सिंह, पुलिस उप अधीक्षक अजय कपूर, वन मंडल अधिकारी निशांत मन्ढोत्रा, डॉ शिखा शर्मा के अलावा नगर परिषद के पार्षद और नगर के अन्य प्रबुद्ध लोग भी शामिल हुए। बता दें कि इस बार कोरोना माहामारी के चलते प्रदेश में किसी भी तरह के मेलों और त्योहारों का आयोजन नहीं किया जा रहा है।

 

मिंजर मेला के बारे में

मिंजर चंबा का सबसे लोकप्रिय मेला है। यह मेला श्रावण महीने के दूसरे रविवार को आयोजित किया जाता है। मेला की घोषणा मिंजर के वितरण से की जाती है जो पुरुषों और महिलाओं के पहने पोशाको के कुछ हिस्सों पर रेशम की लटकन रूप में समान रूप पहनी जाती है। यह लटकन धान और मक्का की कटाई का प्रतीक है जो वर्ष के इस समय के आसपास उनकी उपस्थिति बनाते हैं। जब ऐतिहासिक चोगान मैदान में मिंजर का झंडा फहराया जाता है तब हफ्ते भर का मेला शुरू होता है। जिसमें खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। तीसरे रविवार को उल्लासए रंगीनता और उत्साह अपने अभिविन्यास तक पहुंचते हैं, जब नृत्य करने वाले मंडलियों के साथ रंगीन मिंजर जुलूस, परंपरागत रूप से स्थानीय पोशाकए पुलिस और होम गार्ड बैंड के साथ पारंपरिक ड्रम बॉटर, अपनी मार्च के लिए अखण्ड चंडी पैलेस से पुलिस लाइन के पास नलहोरा स्थल के लिए शुरू होता है। एक विशाल लोगो की भीड़ वहां पहले से इकट्ठा होती है। पहले राजा और अब प्रदेश के सीएम एक नारियल, एक रुपया, एक मौसमी फल और एक मिंजर जो लाल रंग के कपड़े में बंधे होते हैं -लोहान नदी में चढ़ाते हैं। इसके बाद सभी लोग नदी में अपने मिंजरों को चढ़ाते हैं। पारंपरिक कुंजरी-मल्हार को स्थानीय कलाकारों द्वारा गाया जाता है। मिंजर मेला हिमाचल प्रदेश के राज्य मेलों में से एक मेले के रूप में घोषित किया गया है।

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