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Mural Art के जरिए प्रदर्शित होगी सुकेत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर

चंडीगढ़- मनाली एनएच पर आने वाले पर्य़टक निहार करते हैं इस धरोहर को

Mural Art के जरिए प्रदर्शित होगी सुकेत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर

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सुंदरनगर। सुकेत रियासत की ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक धरोहर म्यूरल आर्ट (Mural art) के जरिए प्रदर्शित की जाएगी।मंडी जिला में पहली बार लोगों और पयर्टकों को यहां की सांस्कृतिक धरोहरों को देखने का मौका मिलेगा। इसके लिए टिकट लेने की भी आवश्यकता नहीं होगी। चंडीगढ़ से मनाली एनएच( Chandigarh – Manali NH) पर पयर्टक( Tourist) आते-जाते हुए इन्हें निहार सकते हैं। सुंदरनगर के जवाहर पार्क की दीवारों पर म्यूरल आर्ट के माध्यम से सुकेत रियासत की विरासत और सांस्कृतिक धरोहरों देखने का मौका मिलेगा। नगर परिषद( Nager parishad)ने इसका खाका तैयार कर लिया है। इसके लिए करीब साढ़े तीन लाख का अनुमानित बजट रखा गया है। मूर्ति कला और चित्रकला में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर पुरस्कार जीत चुके बिलासपुर के विजय राज उपाध्याय को इसका जिम्मा सौंपा गया है। पहले चरण मे जवाहर पार्क में इन तस्वीरों को बनाने के बाद सिनेमा चौक स्थित लक्ष्मण वाटिका में पर्यावरण आधारित तस्वीरें बनाई जाएंगी। इसके बाद तीसरे चरण में नरेश चौक पर शहीद नरेश चौहान की मूर्ति भी तैयार की जाएगी। यह सीमेंट से बनाए जाने वाला ऐसा आर्ट है जो कई दशकों बना रहेगा। संभावना है कि 15 अक्टूबर कार्य आरंभ कर दिया जाए।


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क्या है म्यूरल आर्ट

दीवारों पर बनी बड़ी-बड़ी पेंटिंग्स का नाम है म्यूरल आर्ट। म्यूरल मतलब रंगों की मदद से दीवारों पर उकेरे गए ऐसे चित्र, जो बिल्कुल जीवंत लगते हैं। यह कला भारतीयों के लिए नयी नहीं है, लेकिन मॉडर्न आर्ट ने इसे लोकप्रिय बनाने में खूब मदद की है। म्यूरल्स हमारे लिए इसलिए भी खास हैं, क्योंकि अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति दिलाने में भी ये मददगार साबित हुए थे। भित्ति चित्रों के माध्यम से अपनी बात लोगों तक पहुंचाना भारतीय संस्कृति की पुरानी पहचान रही है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में खंडहरनुमा महलों में आज भी ऐतिहासिक म्यूरल्स देखे जा सकते हैं। पहले इस काम को कुछ खास जातियां या परिवार किया करते थे, लेकिन अब ये प्रोफेशनल काम बन चुका है। आमतौर पर इसे दीवारों पर बनाई गई पेंटिंग के रूप में समझा जाता है। दीवारों पर पेंटिंग बनाने से हट कर सोचने व क्रियान्वित करने के ट्रेंड ने इसे बहुआयामी बना दिया है। अब टाइल्स, टेराकोटा, सीमेंट, बालू, ग्लास, प्लास्टिक, लोहे और स्टील आदि माध्यमों से परमानेंट म्यूरल बनाए जाते हैं।

 

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म्यूरल आर्ट में इन्हें मिलेगी जगह

म्यूरल आर्ट में सुकेत रियासत मंदिर महामाया, शुकदेव मुनि, माहू नाग देव के अतिरिक्त मंडी जिला की सांस्कृतिक धरोहरें और देवता मेले के स्वरुप को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके लिए भाषा एवं संस्कृति विभाग का सहयोग भी लिया जाएगा। कुल्लू-मनाली जाने वाले पयर्टकों को सुकेत रियासत और मंडी जिला की सांस्कृतिक धरोहरों बारे अवगत करवाना इसका मुख्य उदेश्य रहेगा। बिलासपुर के प्रसिद्ध मॉल और उपायुक्त कार्यालय में अभी तक म्यूरल आर्ट के माध्यम से धरोहरों को दिखाया गया है। नगर परिषद सुंदरनगर की कार्यकारी अधिकारी उवर्शी वालिया ने बताया की सुकेत रियासत की विरासत और यहां की सांस्कृतिक धरोहरों को म्यूरल आर्ट के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। जवाहर पार्क की दीवारों पर इन्हें तैयार किया जाएगा।

 

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