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होलिका दहन के बाद राख मानी जाती है पवित्र

Holika dahan Importance on holi festival

होलिका दहन के बाद राख मानी जाती है पवित्र

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होली की पूजा होलिका दहन से ठीक पहले की जाती है। यह पूजा कहीं भी की जा सकती है। आमतौर पर लोग इस पूजा को सामुदायिक तौर पर एक साथ करते हैं।

Holika dahan Importanceहर गली-मोहल्ले में होली के कई दिन पहले से किसी सार्वजनिक स्थान पर लकड़ियां, सूखी पत्तियां, पेड़ की डालियां, गोबर के उपले इत्यादि सामग्री जमा किया जाना शुरू हो जाता है। यह ढेर एक मजबूत लकड़ी के आसपास इकठ्ठा किया जाता है और इसे होलिका नाम से बुलाया जाता है। होलिका दहन वाले दिन इसे जलाने से पहले इसकी पूजा की जाती है।

होलिका दहन के बाद जो राख बचती है, लोग उसे घर ले जाते हैं और दूसरे दिन इस राख को अपने शरीर पर मलते हैं। ऐसा करना शुभ माना जाता हैं। कहते हैं ऐसा करने से शरीर पवित्र होता है। इसके बाद सब रंग और अबीर से होली खेलते हैं। होलिका दहन, फाल्गुन माह की पूर्णिमा को किया जाता है। इसे सूर्यास्त के पश्चात् प्रदोष के समय, जब पूर्णिमा तिथि हो तब करना चाहिए।

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