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अतिथि भगवान के समान

अतिथि भगवान के समान

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कोई भी अतिथि बनकर घर आए तो उनका सम्मान और खुशी से स्वागत करना चाहिए। अतिथि भगवान के समान होता है इसलिए उनका सम्मान करते हुए अच्छा आचरण, अच्छा व्यवहार करें ताकि उनके मन से आपके लिए आशीर्वाद और शुभकामनाएं निकलें। खाना बनाते और खिलाते समय मन पवित्र रखकर अतिथि का सत्कार करें। मन में किसी प्रकार की कटुता का भाव न रखें, क्योंकि किया हुआ ही वापस मिलता है, चाहे कर्म हो या भाव हो।


अतिथि सत्कार में मधुर वाणी का विशेष महत्व होता है। मधुर वाणी होने से गरीब के घर बासी खाना खाकर भी उसकी तारीफ और सम्मान होता है। इसलिए अतिथि सत्कार में मधुर वाणी के साथ ही अतिथि सत्कार करें। घर आए अतिथि को कभी भी खाली हाथ विदाई नहीं देना चाहिए। अतिथि का खाली हाथ घर से जाना आपकी दरिद्रता और निर्धनता का प्रतीक होता है, इसलिए अतिथि कुछ न कुछ जरूर दें। कुछ न हो तो फल या मीठा ही दे दें। भारतीय संस्कार में अतिथि को देवता की उपाधि दी गई है इसलिए अतिथि का सत्कार देवता समान ही करना चाहिए ताकि आपके घर परिवार और रिश्ते में मधुरता, मिठास और प्रेम संबंध बना रहे और लंबे समय तक चल सके।


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