Covid-19 Update

2,05,499
मामले (हिमाचल)
2,01,026
मरीज ठीक हुए
3,504
मौत
31,526,622
मामले (भारत)
196,707,763
मामले (दुनिया)
×

अगर अभी भी नहीं माने तो इस सदी के अंत तक India में लू की तीव्रता 3-4 गुना बढ़ने की उम्मीद

अगर अभी भी नहीं माने तो इस सदी के अंत तक India में लू की तीव्रता 3-4 गुना बढ़ने की उम्मीद

- Advertisement -

नई दिल्ली। देश में जारी कोरोना वायरस (Coronvirus) के कहर के बीच जलवायु परिवर्तन का देश पर प्रभाव से संबंधित एक सरकारी रिपोर्ट सामने आई है। सरकारी संस्था ‘जलवायु परिवर्तन अनुसंधान केंद्र’ की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में इस सदी के अंत तक औसत तापमान 4.4°C और लू की तीव्रता 3-4 गुना बढ़ने की उम्मीद है। बतौर रिपोर्ट, गर्म दिन-रात होने की घटनाओं में 55%-70% बढ़ोतरी होने की उम्मीद है और प्रमुखत: ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन से 1901-2018 के बीच भारत का औसत तापमान 0.7°C बढ़ा। सकी मुख्य वजह ग्रीन हाउस गैसों की वजह से बढ़ी गर्मी है। इस रिपोर्ट को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री हर्ष वर्धन द्वारा मंगलवार को प्रकाशित किये जाने की उम्मीद है।

सबसे सर्द रात के तापमान में करीब 4.7 डिग्री सेल्सियस बढ़ोतरी होगी

रिपोर्ट के अनुसार 21वीं सदी के अंत तक भारत के औसत तापमान में करीब 4.4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी का पूर्वानुमान है। देश में 1986 से 2015 की 30 साल की अवधि के दौरान वर्ष के सबसे गर्म दिन और सबसे ठंडी रात के तापमान में क्रमश: करीब 0.63 डिग्री सेल्सियस और 0.4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक इस सदी के अंत तक सबसे गर्म दिन और सबसे सर्द रात के तापमान में क्रमश: करीब 4.7 डिग्री सेल्सियस और 5.5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होने का पूर्वानुमान है। इसमें कहा गया कि गर्म दिन और गर्म रातों की आवृत्ति के क्रमश: 55 और 70 प्रतिशत बढ़ने का पूर्वानुमान है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि गर्मी (अप्रैल-जून) में भारत में चलने वाली लू की आवृत्ति 21वीं सदी के अंत तक तीन से चार गुना ज्यादा होने की उम्मीद है।


यह भी पढ़ें: कोरोना या रेबीज, Chamba में संक्रमित किशोर की मौत के क्या रहे कारण- पढ़ें यह रिपोर्ट

सबसे ज्यादा नुकसान गंगा के मैदानी इलाकों और पश्चिमी घाटों को हुआ

रिपोर्ट्स के अनुसार उष्णकटिबंधीय हिंद महासागर की समुद्री सतह का तापमान 1951 से 2015 के बीच औसतन एक डिग्री सेल्सियस बढ़ गया, जो इस अवधि के वैश्विक औसत 0.7 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा है। उत्तरी हिंद महासागर का जलस्तर 1874 से 2004 के बीच प्रतिवर्ष 1.06 से लेकर 1.75 मिलीमीटर की दर से बढ़ा, जबकि बीते ढाई दशक (1993 से 2017) में इसके बढ़ने की दर 3.3 मिलीमीटर प्रतिवर्ष रही, जो वैश्विक माध्य समुद्र तल वृद्धि के बराबर है। रिपोर्ट के मुताबिक उत्तरी हिंद महासागर में समुद्र तल का स्तर करीब 300 मिलीमीटर बढ़ जाएगा। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में मानसून के मौसम (जून से सितंबर) में भी 1951 से 2015 के बीच करीब छह प्रतिशत की कमी आई है और सबसे ज्यादा नुकसान गंगा के मैदानी इलाकों और पश्चिमी घाटों को हुआ है।

- Advertisement -

Facebook Join us on Facebook Twitter Join us on Twitter Instagram Join us on Instagram Youtube Join us on Youtube

हिमाचल अभी अभी बुलेटिन

Download Himachal Abhi Abhi App Himachal Abhi Abhi IOS App Himachal Abhi Abhi Android App

टेक्नोलॉजी / गैजेट्स / ऑटो

Himachal Abhi Abhi E-Paper


विशेष




सब्सक्राइब करें Himachal Abhi Abhi अलर्ट
Logo - Himachal Abhi Abhi

पाएं दिनभर की बड़ी ख़बरें अपने डेस्कटॉप पर

अभी नहीं ठीक है