संतान प्राप्ति के लिए करें श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत

संतान प्राप्ति के लिए करें श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत

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श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी भी कहते हैं। संतान प्राप्ति के लिए यह बहुत पुण्यदायी व्रत माना गया है। इस व्रत का अनंत फल है। इस व्रत को श्रद्धा पूर्वक करने से संतान प्राप्ति की कामना पूरी होती है। यदि आपके पास संतान है तो भी इस व्रत को रखने से संतान योग्य होती है और शिक्षा तथा प्रतियोगिता में सफलता प्राप्त करती है। श्रावण पुत्रदा एकादशीः 22 अगस्त 2018, बुधवार को है। 23 अगस्त को व्रत खोलने का समय 05:58 से 08:32 तक का है।

जानिए कैसे करें श्रावणी एकादशी का व्रत

ज्योतिषाचार्य पं. दयानन्द शास्त्री ने बताया कि वर्ष में दो बार पुत्रदा एकादशी मनाई जाती है एक पौष शुक्ल पक्ष में और दूसरी सावन के शुक्ल पक्ष की एकादशी को। सावन के शुक्ल पक्ष की एकादशी को सावन पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। माना जाता है, पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्रदा एकादशी व्रत करना चाहिए। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, सावन पुत्रदा एकादशी जुलाई या अगस्त के महीने में आती है। पौष की पुत्रदा एकादशी को उत्तरी भारत के प्रदेशों में बड़े स्तर पर मनाया जाता है जबकि सावन की पुत्रदा एकादशी अन्य प्रदेशों में मानी जाती है। वैष्णव समुदाय, इस एकादशी को पवित्रोपना एकादशी या पवित्र एकादश के नाम से जानते हैं।

पुत्रदा एकादशी की कथा और विधान

नि:संतान दंपति श्रावण शुक्ल एकादशी के दिन बिना कुछ खाए पिए पूरे संयम और नियम से व्रत करें। सुबह जल्दी उठकर नहाएं और भगवान विष्णु की पूजा करें। इसके बाद किसी ब्राह्मण को यथायोग्य दान-दक्षिणा दें। फिर द्वादशी के दिन व्रत का पारणा करें।

पीपल के पेड़ की पूजा करें : जिन दंपतियों की संतान पैदा होने के बाद मृत हो जाती हो या स्त्री का गर्भपात हो जाता हो वे इस एकादशी के दिन व्रत करें। सुबह ब्रह्ममुहूर्त में किसी पीपल के पेड़ के पास जाकर उसकी जड़ में चांदी के लोटे से कच्चे दूध में मिश्री मिलाकर चढ़ाएं। पीपल के तने पर सात बार मौली लपेटकर संतान की अच्छी सेहत की प्रार्थना करें।

श्रावण पुत्रदा एकादश व्रत के लाभः

हिन्दू धर्म में बहुत से महत्वपूर्ण संस्कार किए जाते है, जिनमें से कुछ संस्कारों में पुत्र का होना बहुत जरूरी होता है। प्रत्येक शादीशुदा दंपत्ति पुत्र संतान की इच्छा रखते हैं परन्तु बहुत से कारणों की वजह से कुछ दंपतियों को पुत्र रत्न की प्राप्ति नहीं होती जिसके कारण वे बहुत परेशान रहते हैं। ऐसी ही स्थितियों में सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत करना लाभकारी माना जाता है। पुत्र सुख की प्राप्ति के लिए पुत्र एकादशी का व्रत रखा जाता है। शास्त्रों के अनुसार जो दंपति पुत्र प्राप्ति की इच्छा रखते हैं उन्हें साल में दोनों बार पुत्रदा एकादशी का व्रत करना चाहिए। इसके अलावा निःसंतान दंपत्ति भी सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत रखते संतान सुख प्राप्त कर सकते हैं। कहा जाता है इस व्रत को रखने से वंश में वृद्धि होती है और मृत्यु के पश्चात व्यक्ति को स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

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