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वट सावित्री व्रत : सौभाग्य की प्राप्ति और पति की लंबी आयु की कामना

How to do Vat savitri vrat for For long life of husband

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हिंदू धर्म मे वट सावित्री व्रत की अहमियत करवाचौथ के समान ही है। यह व्रत स्त्रियां सौभाग्य की प्राप्ति और पति की लंबी आयु की कामना  के लिए करती है। कहते हैं कि इस व्रत को संपन्न कर सावित्री ने यमराज को हरा कर अपने पति सत्यवान के प्राण बचाए थे। जब यमराज सत्यवान के प्राण ले जाने लगे तो सावित्री भी पीछे चलने लगी ऐसे में यमराज ने उन से तीन वर मांगने को कहा, सावित्री ने उनसे सौ पुत्रों का वरदान मांगा। जब यम ने यह वरदान दिया तो सावित्री ने कहा कि वह पतिव्रता स्त्री है और बिना पति के मां नहीं बन सकती। यमराज को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने चने के रूप में सत्यवान को प्राण दे दिए। सावित्री ने सत्यवान के मुंह में चना रख कर फूंक दिया, जिससे वे जीवित हो गए तभी से उस व्रत में चने का प्रसाद चढ़ाने का नियम है। जानें कैसे करें व्रत …
Vat savitri vratव्रत के दिन, दैनिक कार्य कर घर को गंगाजल से पवित्र करना चाहिए। इसके बाद बांस की टोकरी में सप्त धान्य भरकर ब्रह्माजी की प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए। ब्रह्माजी के बाईं ओर सावित्री तथा दूसरी ओर सत्यवान की मूर्ति स्थापित करनी चाहिए। इसके बाद टोकरी को वट वृक्ष के नीचे ले जाकर रख देना चाहिए। इसके पश्चात सावित्री व सत्यवान का पूजन कर, वटवृक्ष की जड़ में जल अर्पण करना चाहिए। पूजन के समय जल, मौली, रोली, सूत, धूप और चने का इस्तेमाल करना चाहिए। सूत के धागे को वट वृक्ष पर लपेटकर तीन बार परिक्रमा कर सावित्री व सत्यवान की कथा सुनें।
अब निम्न श्लोक से सावित्री को अर्घ्य दें : –
अवैधव्यं च सौभाग्यं देहि त्वं मम सुव्रते।
पुत्रान्‌ पौत्रांश्च सौख्यं च गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तु ते॥
तत्पश्चात सावित्री तथा सत्यवान की पूजा करके बड़ की जड़ में पानी दें।
यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोऽसि त्वं महीतले।
तथा पुत्रैश्च पौत्रैश्च सम्पन्नं कुरु मा सदा॥
बड़ के पत्तों के गहने पहनकर वट सावित्री की कथा सुनें।
  • भीगे हुए चनों का बायना निकालकर, नकद रुपए रखकर सासुजी के चरण-स्पर्श करें। यदि सास वहां न हों तो बायना बनाकर उन तक पहुंचाएं।
  • वट तथा सावित्री की पूजा के पश्चात पान, सिन्दूर तथा कुमकुम से सौभाग्यवती स्त्री के पूजन का भी विधान है। यही सौभाग्य पिटारी के नाम से जानी जाती है।
  • इस अवसर पर सौभाग्यवती स्त्रियों का भी पूजन होता है।
  • पूजा समाप्ति पर ब्राह्मणों को वस्त्र तथा फल आदि वस्तुएं बांस के पात्र में रखकर दान करने के बाद चने का प्रसाद बांटना चाहिए।

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