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आप के घर की दीवारों के रंग कुछ हल्के… कुछ गहरे

आप के घर की दीवारों के रंग कुछ हल्के… कुछ गहरे

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वास्तु शास्त्र एक प्राचीन विद्या है पर अभी उसका महत्व कम नहीं हुआ है। यदि आप अपने घर में वास्तु शास्त्र के अनुसार निर्धारित रंग का प्रयोग करते हैं तो अवश्य ही कुछ हद तक आपकी जिन्दगी में खुशियों का रंग भर जाएगा। ड्राइंगरूम, मेहमान का कमरा या स्वागत कक्ष हमारे घर का बहुत ही महत्त्वपूर्ण कमरा होता है यह वह स्थान है जहां घर के सभी सदस्य एक साथ बैठते हैं तथा अतिथि भी जब घर में आते हैं तो सबसे पहले इसी कक्ष में उनका स्वागत होता है। अतः ड्राइंग रूम में ऐसे रंगों का प्रयोग करें जो इसे आकर्षक बना दें।

  • बैठक कक्ष में सफेद, गुलाबी, पीला, क्रीम या हल्का भूरा रंग तथा हल्का नीला का प्रयोग करना चाहिए।
  • शयन कक्ष की दीवारों पर गहरे और आंखों को चुभने वाले रंगों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इस कक्ष में हल्के तथा वैसे रंग का प्रयोग करें जो आपके मन को शांति व सौम्यता प्रदान करने वाला हो।
  • शयन कक्ष की दीवारों पर आसमानी, हल्का गुलाबी, हल्का हरा तथा क्रीम रंग का प्रयोग करवाना चाहिए।
  • भोजन का कमरा का बहुत ही महत्त्व होता है क्योकि यह वह स्थान होता है जहां पर घर के प्रत्येक सदस्य एक साथ बैठकर भोजन करते हैं। भोजन के दौरान कई बार बहुत ही महत्त्वपूर्ण निर्णय ले लिया जाता है अतः इस स्थान पर वैसे रंग का प्रयोग किया जाए जो घर के सभी सदस्यों को जोड़ने में सहायक हो।

  • भोजन के कमरे में हल्का हरा, गुलाबी, आसमानी या पीला रंग शुभ फल देता है।
  • दक्षिण पूर्व दिशा में रसोई घर बनाना चाहिए। इस दिशा का स्वामी ग्रह शुक्र है तथा देवता अग्नि है। अपने रसोईघर में सकारत्मक ऊर्जा के प्रवाह के लिए हमें शुक्र ग्रह से संबंधित रंग का ही प्रयोग करना चाहिए। रसोईघर के लिए सबसे शुभ रंग सफेद अथवा क्रीम होता है। यदि रसोईघर में वास्तु दोष है तो रसोईघर के आग्नेय कोण में लाल रंग का भी प्रयोग कर सकते हैं।

  • अपने घर में पूर्व तथा दक्षिण पश्चिम दिशा अध्ययन कक्ष के लिए सबसे अच्छा होता है। अध्ययन कक्ष के लिए हल्के रंग का प्रयोग करना बेहतर होता है।
  • अध्ययन कक्ष के लिए क्रीम कलर, हल्का जामुनी, हल्का हरा या गुलाबी, आसमानी या पीला रंग का प्रयोग करना अच्छा होता है।
  • स्नानघर एवं शौचालय में सफेद, गुलाबी या हल्का पीला या हल्का आसमानी रंग का प्रयोग करने से मन को सुकून मिलता है।
  • हमारी छतें प्रकाश को परावर्तित कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं इस कारण से इस स्थान पर ऐसे रंग का प्रयोग करना चाहिए जो परावर्तन में सहायक हो। छत के लिए सबसे उपयुक्त रंग है सफेद अथवा क्रीम।

  • हमेशा कोशिश करनी चाहिए कि पूजा का कमरा घर के ईशान कोण में बनाया जाय। यह वह स्थान होता है जहां बैठकर हम सब ध्यान और साधना के माध्यम से अपने मन की शांति तथा इच्छाओं की पूर्ति के लिए भगवान से प्रार्थना करते हैं। इसलिए पूजा घर में ऐसे रंग का प्रयोग करना चाहिए जो हमें एकाग्रता प्रदान करे। पूजा घर में गहरे अथवा विभिन्न प्रकार के अलग-अलग रंगों का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योकि वह मन को भ्रमित कर सकता है।
  • घर का रंग शांति और एकाग्रता का प्रतीक सफेद, हल्के नीले या पीले रंग का प्रयोग करना चाहिए। आध्यात्मिक रंग गेरुआ व नारंगी का प्रयोग करना शुभ होगा।

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