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Students के लिए अब आसान होगी केलकुलेशन, शिक्षा बोर्ड करेगा कुछ ऐसा

Students के लिए अब आसान होगी केलकुलेशन, शिक्षा बोर्ड करेगा कुछ ऐसा

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कांगड़ा। छात्रों के लिए केलकुलेशन आसान होगी। एचपी बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन (HP Board of School Education) कुछ इस तरह के प्रयास करने जा रहा है। बोर्ड पाठ्यक्रम में  वैदिक मैथमेटिक्स को जोड़ने का प्रयास कर रहा है। यह जानकारी एचपी बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन के चेयरमैन डॉ. सुरेश कुमार सोनी (HP Board of School Education Chairman Dr. Suresh Kumar Soni) ने हिमाचल अभी अभी से बातचीत में दी। उन्होंने कहा कि कोई छात्र अगर वैदिक मैथमेटिक्स अच्छी तरह सीखता है तो किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में जल्दी से केलकुलेशन कर कम समय में प्रश्न हल कर सकता है, उस छात्र के मुकाबले जिसे वैदिक मैथमेटिक्स नहीं आता है। बोर्ड इस तरह के प्रयास कर रहा है।

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उन्होंने कहा कि एचपी बोर्ड में छात्रों की एनरोलमेंट बढ़ी है। छात्रों का एचपी बोर्ड की तरफ दोबारा रूझान बढ़ रहा है। इसका कारण है कि बोर्ड ने छात्रों का तनाव कम करने के लिए हर लेबल पर प्रयास किए हैं। छात्रों में फ्लाइंग का डर कम किया है। पहले एक सेंटर में पांच-छह फ्लाइंग जाती थीं। अब बोर्ड ने निर्णय लिया है कि केवल दो फ्लाइंग जाएंगी, वो भी आग्रही भाव से। अगर तीसरी फ्लाइंग जाएगी वह रजिस्ट्रर पर हाजिरी लगाकर लौट आएगी। परीक्षा केंद्र के अंदर नहीं जाएगी। वार्षिक परीक्षा में कंपार्टमेंट लेने वाले छात्रों के लिए सितंबर की जगह जून माह में एग्जाम करवाए हैं। इसमें 50 फीसदी छात्र पास हुए हैं। फेल छात्रों को भी एसओएस (SOS) के माध्यम से मौका दिया गया है। बोर्ड ने एनसीआरटी (NCRT) का पाठ्यक्रम अपनाया है। सीबीएससी (CBSE) और एचपी बोर्ड का सलेबस एनसीआरटी (NCRT) आधारित है।

पेपर का पैटर्न भी बदला

शिक्षा बोर्ड ने पेपर का पैटर्न भी बदला है। बोर्ड अब 40 फीसदी बहुत आसान, 40 फीसदी औसतन और 20 फीसदी हार्ड लेबल के प्रश्न डालता है। शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सुरेश कुमार सोनी ने बताया कि हमारा मानना है, हर बच्चे का लेबल एक जैसा नहीं हो सकता है। एक लाठी से किसी को नहीं हांका जा सकता है। हर एक की क्षमताएं अलग-अलग होती हैं। इसके लिए उक्त पैटर्न अपनाया है। इससे बच्चा स्वयं 33 या 35 फीसदी नंबर ले लेता है। तो उसे लगेगा कि यह उसने स्वयं किया है। ऐसे में उसका उत्साह बढ़ेगा और वह आगे अच्छा कर सकता है। ऐसे कई उदाहरण हैं कि जिसमें बच्चे ने आगे चलकर अच्छा प्रदर्शन किया है।

 

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