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EDUCATION के नाम पर धोखा अब और नहीं

EDUCATION के नाम पर धोखा अब और नहीं

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गफूर खान/धर्मशाला। शिक्षा के व्यापारीकरण पर नकेल कसने की शुरुआत हो चुकी है। इसके लिए प्रशासन और शिक्षा विभाग के साथ मिलकर जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है। यह बात प्रदेश शिक्षा नियामक आयोग सदस्य सुनील शर्मा ने आज धर्मशाला में कही। उन्होंने कहा कि से सबसे ज्यादा नुक्सान शिक्षा को ही हो रहा है और इससे गरीब तबके के विद्यार्थी सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए हिमाचल प्रदेश शिक्षा नियामक आयोग ने फर्जी शिक्षण संस्थानों की पहचान करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है।

  • शिक्षा नियामक आयोग ने छेड़ा जागरुकता अभियान
  •  प्रशासन और शिक्षा विभाग को भी अभियान चलाने के निर्देश

सुनील शर्मा ने कहा की हिमाचल प्रदेश शिक्षा नियामक आयोग पूरे देश में अपनी तरह का एकमात्र आयोग है। शिक्षा की बेहतरी के लिए इस आयोग के प्रयासों को देखते हुए अन्य राज्यों से भी इसकी कार्यप्रणाली देखने के लिए लोग पहुंच रहे हैं।

dshala-2आयोग के पास ज्यादातर आने वाली शिकायतों में वह लोग होते हैं, जो कि बड़ी मुश्किल से बच्चों को उच्च शिक्षा दिलवा रहे हैं। कई लोगों ने ऋण लिए हैं तो कई अपनी जमीन गिरवी रखकर बच्चों को पढ़ाने में लगे हैं। लेकिन कुछ समय बाद उन्हें पता चलता है कि जिस संस्थान में उनके बच्चे का दाखिला हुआ है वह संस्थान ही फर्जी है। ऐसे में उन्हें कहां से सहारा मिलेगा इसकी जानकारी भी लोगों को नहीं है। 

  • पहली बार शिमला से बाहर निकल विद्यार्थियों को न्याय देंगे

अधिकतर लोगों को इस आयोग के बारे में जानकारी ही नहीं है। इसलिए अब जिला प्रशासन और पुलिस के सहयोग से एक जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक लोगों को नियामक आयोग की जानकारी हो। वहीं यह भी प्रयास किया जा रहा है कि स्कूल से पास आउट होने वाले बच्चे को ही यह जानकारी मिल सके कि कौन सा संस्थान सही है या नहीं है। ताकि फर्जी संस्थानों के झांसे में आने से बच्चे पहले ही सचेत हो सकें।सुनील शर्मा ने बताया कि पहले teacher-clipartशिकायतकर्ताओं को शिमला में आकर केस लड़ना पड़ता था, लेकिन अब यह प्रयास किया जा रहा है कि उनके निकटतम स्थानों पर  ही आयोग उनकी शिकायतों को सुने। इस क्रम में आज धर्मशाला में जिला कांगड़ा और चंबा से प्राप्त शिकायतों की सुनवाई हुई। इसके अलावा यदि कोई शिकायत या सुझाव देना चाहता है तो वह भी एसडीएम ऑफिस धर्मशाला में आ सकता है।

सुनील शर्मा ने पुलिस प्रशासन के अधिकारियों से आग्रह किया कि वह भी फर्जी संस्थानों की पहचान कर सकते हैं। शर्मा ने कहा कि विभाग की वेबसाइट पर प्रदेशभर में वैध संस्थानों की सूची उपलब्ध है। यह सूची सभी स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में सूचना पट्ट पर प्रदर्शित करवाने के लिए शिक्षा विभाग को आग्रह किया गया है, ताकि बच्चे स्कूलों से निकलने से पहले ही अच्छी तरह से यह जानकारी हासिल कर सकें।  आज के दौर में कंप्यूटर शिक्षा, होटल मैनेजमेंट, फैशन डिजाइनिंग, बीसीए, एमसीए और एमबीए के नाम पर बच्चों को लूटा जा रहा है। उन्होंने आग्रह किया है कोई भी व्यक्ति अपनी पहचान बताए बिना भी आयोग के पास शिकायत कर सकता है।

ऐसे संस्थान हैं फर्जी

दो और तीन कमरों में चलाए जा रहे संस्थान कहीं से भी मान्य नहीं हो सकते।  किसी भी संस्थान को राज्य सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र मिला होना चाहिए।  उस संस्थान की राज्य या केंद्र सरकार के स्तर पर संबद्धता होनी चाहिए। संबंधित सरकारी विभाग से मान्यता भी education-boardमिली होनी चाहिए।

ये तीन चीजें बताएंगी संस्थान फर्जी या नहीं

जिस राज्य से विश्वविद्यालय को संबद्धता मिली है, उसी राज्य में वह शिक्षा गतिविधियां चला सकता है। अन्य राज्यों में प्रदान की जाने वाली शिक्षा पूरी तरह से गैर-कानूनी है। कॉलेज के साथ स्कूल का संचालन नहीं किया जा सकता। दोनों के लिए अलग अलग भवन होना आवश्यक है। यदि किसी शिक्षण संस्थान को इस बारे में किन्हीं कारणों से एनओसी दे दी गई है उन संस्थानों को भी तुरंत अलग कैंपस बनाने के निर्देश दिए जा चुके हैं। यूजीसी के आदेशानुसार कोई भी निजी शिक्षण संस्थान डिस्टेंस एजुकेशन प्रदान नहीं कर सकता। यदि अब भी कोई निजी शिक्षण संस्थान डिस्टेंस एजुकेशन देने की बात कहता है तो यह पूरी तरह से गैरकानूनी है।

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