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एनजीटी के आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती देने को सरकार तैयार

एनजीटी के आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती देने को सरकार तैयार

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शिमला। एनजीटी के शिमला प्लानिंग एरिया के आदेशों को प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट में चुनौती देने का फैसला लिया है। इसमें राज्य सरकार एनजीटी के आदेशों के अधिकार क्षेत्र को ही चुनौती देगी। इसमें सरकार ने लॉ डिपार्टमेंट की सलाह के बाद हाईकोर्ट के एडवोकेट जनरल जल्द ही हाईकोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर करेंगे।

टीसीपी विभाग ने एडवोकेट जनरल को इस मसले पर जल्द चुनौती देने को कहा है। टीसीपी विभाग ने लीगल ओपिनियन लेने के बाद याचिका दायर करने का निर्णय लिया है। बता दें कि एनजीटी ने अपने आदेशों में नवंबर 2017 में शिमला प्लानिंग एरिया में ढाई मंजिल से ज्यादा का निर्माण न करने और यहां बने भवनों को नियमित करने के लिए पर्यावरण सेस लगाने रेगुलाइजेशन फीस के साथ वसूलने के आदेश दिए थे। इसमें सरकार अब तर्क दे रही है कि एनजीटी पर्यावरण संबंधी आदेश दे सकती है, लेकिन भवनों की मंजिल और नियमित करने की फीस तय करने के आदेश देना एनजीटी के दायरे में नहीं आता है।


प्रदेश सरकार ने एनजीटी में ही रिव्यू पिटीशन दायर की थी, लेकिन इसकी रिव्यू पिटीशन को भी एनजीटी ने खारिज कर दिया था। इसके साथ बिना अनुमति के बने भवनों को नियमित करने पर भी रोक लगा दी है। प्रिंसिपल सेक्रेटरी टीसीपी प्रबेाध सक्सेना ने कहा कि एनजीटी के उन आदेशों के खिलाफ सरकार ने हाईकोर्ट जाने की पूरी तैयारी कर दी है, जिसमें ढाई मंजिला भवन से अधिक पर रोक लगी है। सरकार ने एडवोकेट जनरल को पूरी राय दी है और जल्द ही रिव्यू पिटीशन दायर करेंगे।

शिमला में ढाई मंजिल से ज्यादा निर्माण पर है रोक

राजधानी शिमला के प्लानिंग एरिया में ढाई मंजिल से अधिक भवन निर्माण नहीं हो सकेगा। शिमला के ग्रीन और कोर एरिया में नए भवन निर्माण की रोक रहेगी। इसकी रिव्यू पिटीशन में भी सरकार को राहत नहीं मिली है। एनजीटी ने अपने आदेशों में कहा कि इस याचिका में कोई मेरिट नहीं कि इसे दोबारा सुना जाए। राजधानी के ग्रीन ओर कोर एरिया में नए निर्माण पर पूरी तरह से रोक रहेगी। इन दोनों क्षेत्रों में हुए अवैध निर्माण को नगर निगम को गिराने के आदेश भी दिए हैं।

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