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माइनिंग स्थलों की ऑक्शन प्रक्रिया में देरी के लिए जिम्मेवार अधिकारी नपेंगे

माइनिंग स्थलों की ऑक्शन प्रक्रिया में देरी के लिए जिम्मेवार अधिकारी नपेंगे

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शिमला। उद्योग विभाग के जो अधिकारी खनिज पदार्थों की माइनिंग के स्थानों की ऑक्शन प्रक्रिया में देरी के लिए जिम्मेदार हैं, उन अधिकारियों के खिलाफ जांच अमल में लाई जाए। हाईकोर्ट ने अवैध खनन से जुड़े मामले में मुख्य सचिव को यह निर्देश जारी किए। हाईकोर्ट ने खनिजों के दोहन में हुए बेवजह की देरी से न केवल राज्य को नुकसान हुआ, बल्कि बेरिजगरों के रोजगार भी प्रभावित हुए हैं। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान व न्यायाधीश चंद्र भुसन बारोवालिया ने आदेश जारी किए हैं कि इस जांच को मुख्य सचिव द्वारा बिना किसी डर के, भेदभाव के और बिना किसी अधिकारी को बचाने की मंशा से पूरा किया जाए। कोर्ट ने जांच रिपोर्ट 28 सितंबर तक दाखिल करने के आदेश जारी किए हैं। मामले पर सुनवाई 28 सितंबर को होगी।


कोर्ट ने उद्योग विभाग के प्रधान सचिव द्वारा दायर शपथ पत्र के माध्यम से यह पाया कि कई ऑक्शन स्थलों पर किसी भी बोलीदाता ने ऑक्शन की प्रक्रिया में भाग नहीं लिया। न्यायालय ने यह पाया कि उन क्षेत्रों में अवैध तरीके से व बिना किसी रोक-टोक के लोग खनिज पदार्थ के खनन में लगे हुए हैं। यही कारण है कि किसी भी व्यक्ति ने उन स्थानों पर ऑक्शन में भाग लेना उचित नहीं समझा। न्यायालय ने कहा कि जब तक राज्य सरकार की ओर से अवैध खनन पर अंकुश नहीं लगाया जाएगा, तब तक बोली लगाने वाले ऑक्शन स्थलों पर सामने आना उचित नहीं समझेंगे।


पिछली सुनवाई के दौरान न्यायालय को यह जानकारी दी गई थी कि प्रदेश में थोड़ी से भूमि से खनिज पदार्थों को निकाला जा रहा है। जबकि न्यायालय के समक्ष रखे तथ्यों के अनुसार 44400 हेक्टेयर भूमि पर भरपूर मात्रा में खनिज उपलब्ध है और मात्र 2350 हेक्टेयर भूमि से खनिज निकालने की स्वीकृति प्रदान की गई है, जबकि अन्य 42050 हेक्टेयर भूमि से खनिज पदार्थों का दोहन किया जा सकता है।

करोड़ों की देनदारी पर जताया खेद

प्रदेश हाईकोर्ट ने नगर निगम शिमला द्वारा विशाल हिमाचल टैक्सी यूनियन से एक करोड़ अठारह लाख उनतालीस हजार आठ सौ सत्तानवे रुपये की देनदारी वसूल न करने पर खेद जताया है। न्यायालय ने डिविजनल कमिश्नर शिमला को आदेश दिए हैं कि वह विशाल हिमाचल टैक्सी यूनियन द्वारा दायर अपील का 2 सप्ताह के भीतर निपटारा करें। मामले पर सुनवाई 17 सितंबर को होगी।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने अतिरिक्त मुख्य सचिव शहरी विकास को नगर निगम शिमला द्वारा करोड़ों की देनदारी रिकवर न करने वाले अफसरों के खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई अमल में लाने के आदेश जारी किए हैं। हाईकोर्ट ने नगर निगम शिमला की विभिन्न देनदारियों के 1120 डिफ़ॉल्टरों से लगभग 6 करोड़ का एरियर रिकवर करने के लिए उपयुक्त कदम उठाने के आदेश जारी किए हैं।

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