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26 साल बाद आई याद

26 साल बाद आई याद

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सुंदरनगर। हिमाचल प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की तंद्रा 26 साल बाद टूटी है और बोर्ड को अपने दिए हुए कर्ज वापस लेने का याद आई है। बहुत देरी से ही सही पर बोर्ड के जागने के बाद कुछ किसानों और दस्तकारों में इससे हड़कंप मच गया है। गौरतलब है कि बोर्ड ने वर्ष 1988-89 में दस्तकारों एवं बुनकरों के लिए खड्डी, बांस इकाई स्थापना, मधुमक्खी पालन, लघु कुटीर उद्योग आदि को स्थापित करने के लिए ऋण दिए गए थे।

  • 123खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड ने 1988-89 के लिए कर्ज चुकाने के लिए जारी किए नोटिस
  • लघु उद्योग स्थापित करने के लिए दिए थे ऋण
  • किसान बचाओ अभियान ने सीए को कर्ज माफी के लिए भेजा ज्ञापन
  • ऋण न भरने की स्थिति में कुर्की आदि पर रोक लगाने की मांग

जिला मंडी के चच्योट तहसील की नांडी पंचायत निवासी खिमा राम ने भी वर्ष 1988-89 में खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड से बांस इकाई स्थापना हेतु करीब 6500 रुपए का ऋण 4 फीसद ब्याज पर लिया था। इसमें से खिमा राम ने कुछ ऋण तो चुकता कर दिया था लेकिन उसके खाते में अभी भी 2500 रुपए का ऋण बकाया है। अब बोर्ड ने 9 फीसद ब्याज समेत ऋण वसूली के लिए 14 अक्तूबर को एक पत्र जारी किया है।

खिमा राम का कहना है कि उसने ऋण लिया था और काफी हद तक कर्ज की अदायगी भी कर दी। लेकिन अब वह बूढ़ा हो चुका है और कमाई का भी कोई साधन नहीं है। ऐसे में 2500 रुपए 9 फीसदी ब्याज की दर से भरना उसके बस की बात नहीं है। जमीन भी उतनी नहीं है कि रोटी का गुजारा हो सके और एक बेटा है वह भी बेरोजगार है। इन हालात में वह ऋण की अदायगी करने में असमर्थ है। खिमा राम के अलावा अन्य लोग भी हैं जिन्हें उस समय लिए ऋण की अदायगी के लिए नोटिस भेजा गया है।

rupeesउपरोक्त ऋणों को माफ करने के लिए डीसी मंडी के माध्यम से किसान बचाओ अभियान ने सीएम वीरभद्र सिंह को एक ज्ञापन भेजा है। अभियान के संयोजक देश राज शर्मा ने बताया कि ज्ञापन में कहा गया है कि अधिकतम मूल राशि चुकता करने के दौरान केंद्र व राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2008 की किसानों के ऋण माफी योजना बनी थी । उसके बाद वर्ष 2012 में दस्तकारों और बुनकरों के ऋण माफी की ऐसी ही योजना बनी थी।

इतने लंबे समय तक कोई नोटिस न आने के चलते दस्तकारों ने समझा कि ऋण माफी हो गई है। ऊपर से मौसम की मार और जंगली जानवरों द्वारा फसलों की बर्बादी, बीमारी, बेरोजगारी, महंगाई आदि कारणों से दस्तकारों की हालत पतली है। उन्होंने कहा कि अभियान की मांग है कि जिस तरह से केंद्र व राज्य सरकार उद्योगपतियों और बड़ी कंपनियों को पैकेज व हर वर्ष करोड़ों रुपए की टैक्स छूट आदि रियायतें दे रही हैं। उसी तरह दस्तकारों एवं बुनकरों के लिए भी भेदभाव रहित ऋण माफी योजना लाई जाए। उससे पूर्व इन मामूली ऋणों की अदायगी न होने की स्थिति में कुर्की आदि की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।

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