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नगर परिषद की कहानी, पति-पत्नी ही पार्षद बने

नगर परिषद की कहानी, पति-पत्नी ही पार्षद बने

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वी कुमार। मंडी। नगर परिषद मंडी में सरकार की तरफ से तीन लोगों का मनोनयन हुआ है। मनोनयन होना एक सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। मंडी का मामला रोचक इसलिए है,क्योंकि यह एक जुमले की तरह बन गया है। यहां पति-पत्नी की कहानी ज्यादा समझ आती है। पहले बात करेंगे मनोनीत सदस्य पुष्पराज शर्मा की वह सीएम वीरभद्र सिंह के बेहद करीबी हैं। उनका मनोनयन होना पहले से ही तय माना जा रहा था। पुष्पराज शर्मा करीब 15 वर्ष पहले मंडी नगर परिषद के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इस मर्तबा वह अपने वार्ड से इसलिए चुनाव नहीं लड़ सके क्योंकि वार्ड महिला के लिए रिर्जव था,उनकी पत्नी नीलम शर्मा ने चुनाव लड़ा और वह जीतकर नप की अध्यक्ष भी बन गई।

pati-patni बात करते हैं कंवलजीत कौर की उन्हें भी सरकार ने बतौर पार्षद मनोनीत किया है। कंवलजीत कौर ने पिछली मर्तबा नगर परिषद का चुनाव लड़ा था और हारने के बाद सरकार ने उनके पति सुखनिदान सिंह को नगर परिषद में पार्षद मनोनीत कर दिया। इस मर्तबा नगर परिषद के चुनाव में सुखनिदान सिंह खड़े हुए और हार गए तो सरकार ने उनकी पत्नी कंवलजीत कौर को पार्षद मनोनीत कर दिया। इसी तरह बात करते हैं तीसरे मनोनीत चेहरे महेंद्र कुमार की तो वह मंडी में कांग्रेस का दलित चेहरा माने जाते हैं। जिस रविनगर वार्ड से वह ताल्लुक रखते हैं वह महिलाओं के लिए रिर्जव था तो सरकार ने उन्हें बतौर ईनाम पार्षद मनोनीत कर दिया। यह दूसरी मर्तबा है जब उनका मनोनयन नगर परिषद के लिए हुआ है।

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