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सम्मोहन से चिकित्सा

सम्मोहन से चिकित्सा

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hypnotherapy: सम्मोहन क्रिया पूर्णतः एक शुद्ध साफ मनोवैज्ञानिक क्रिया है इससे लोग इसलिए डरते हैं कि स्टेज के जादूगरों ने सम्मोहन को जादू के खेल से जोड़कर इसे सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। पुरानी विधि में हिप्नोटिज्म द्वारा किसी चमकती क्रिस्टल बॉल, मोमबत्ती इत्यादि लगाकर उसकी तरफ एकटक मरीज को ध्यान करने को रोज आधा घंटा कहा जाता था। यह प्रक्रिया लगभग सात से दस दिन तक चलती थी। उसी समय धीमी गहरी आवाज में मरीज को सम्मोहन निद्रा में पहुंचने का आदेश भी दिया जाता था पर एलोपैथी विज्ञान ने ऐसे इंजेक्शन उपलब्ध करा दिए हैं कि इन्ट्रावेनस इन्जेक्शन द्वारा दस से बारह मिनट में मरीज को सम्मोहन की अवस्था में लाकर उसके भूतकाल के ग्रंथि, डर, घबराहट, किसी भी समय को जाना जा सकता है।

रोगी के चेतन मन के द्वारा अचेतन मन जागृत होते ही स्वयं मरीज अपने मन की पुरानी से पुरानी समस्या खुद दिल खोलकर बताता है। जो मरीज भी खुद नहीं जानता है। समस्या के मालूम होते ही हिप्नोटिज्म डाक्टर अपने प्रभावशाली संदेश निर्देश के रूप में मरीज के अचेतन मन में जमा देता है। इस विधि की उन्नत अवस्था के कारण अब सम्मोहन क्रिया बहुत सरल हो गई है। इससे मरीज की वर्षों पुरानी समस्या कुछ दिनों ही में दूर हो जाती है।


हमारा मानव मस्तिष्क एक सुपर कम्प्यूटर :

हमारे चेतन मन के पीछे एक अचेतन मस्तिष्क रहता है तथा सम्मोहन चिकित्सा इसी अचेतन मस्तिष्क पर कार्य कर मनुष्य की समस्या सदैव के लिए दूर कर देती है। मानव मन का अचेतन मस्तिष्क शरीर के हजारों कार्य करता है जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते। उदाहरण के तौर पर – सांस लेना, पाचन क्रिया, हृदय स्पंदन की क्रिया, हारमोन्स बनने की जटिल क्रिया, खून का दबाव और संचरण, आंखों का झपकना जैसी शरीर की सभी जैविक क्रियाओं में इसी अचेतन मस्तिष्क का मुख्य रोल रहता है तथा इस अचेतन मन में ये आटोमैटिक क्रियाएं कभी कभी चेतन में गलत वहम पैदा कर देती हैं।

यदि किसी छोटे बच्चे को जीवन के प्रारंभ के वर्षों में पूरी तरह से पिता द्वारा डांटा-पीटा जाता है तो वह बड़ी उम्र में डर, घबराहट और मानसिक डिप्रेशन से परेशान रहेगा। वही जब जवान हो जाता है तब अपने बच्चों को जाने-अनजाने अपने पिता के समान पिटाई कर सकता है या फिर किसी बालक के मन पर किसी पुलिस वाले का डर बचपन में अचेतन में बैठ गया और अगर बच्चा संवेदनशील है तो हो सकता है चालीस पचास वर्ष उम्र होने पर भी उसे पुलिस थाने जाने पर उसके हाथ पैर फूल जाएंगे। ऐसी हजारों तरह की समस्याएं मरीज को हल्के या गहरे सम्मोहन में ले जाकर उसके अचेतन को निर्देश देकर ठीक की जा सकती हैं ।

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