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Hypnotism: चमत्कार या विद्या

Hypnotism: चमत्कार या विद्या

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भारत में सम्मोहन यानी हिप्नोटिज्म को एक चमत्कार के रूप में देखा जाता है। मन की बिखरी हुई शक्तियों को एकत्रित करके या एकाग्र करके उस बढ़ी हुई शक्ति से किसी को प्रभावित करना ही सम्मोहन विद्या है। सम्मोहन विद्या भारतवर्ष की प्राचीनतम और सर्वश्रेष्ठ विद्या है। इसकी जड़ें सुदूर गहराइयों तक स्थित हैं। प्राचीन ग्रंथों में सम्मोहन का ज़िक्र कठिन सिद्धि के रूप में किया गया है। सम्मोहन सदैव ही जिज्ञासा एवं आश्चर्य का विषय रहा है। भारत वासियों का जीवन अध्यात्म प्रधान रहा है और भारत वासियों ने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में दर्शन और अध्यात्म को सर्वाधिक महत्व दिया है। इसीलिए सम्मोहन विद्या को भी प्राचीन समय से ‘प्राण विद्या’ या ‘त्रिकालविद्या’ के नाम से पुकारा जाता है। भारतीय दर्शन और भारतीय अध्यात्म, योग और उसकी शक्तियों से जुड़ा हुआ है।

hipo3सम्मोहन को विज्ञान और किंवदंतियों की सीमा रेखा भी कह सकते हैं। आजकल कई टीवी धारावाहिकों में सम्मोहन का इस्तेमाल रहस्य उत्पन्न करने के लिए भी किया जाता है जबकि विदेशों में इसे गंभीर विषय मानते हुए शोध हो रहे हैं। आधुनिक रूप से सम्मोहन 18वीं शताब्दी से प्रारंभ हुआ था। इसे अर्ध-विज्ञान के रूप में प्रतिष्ठित कराने का श्रेय ऑस्ट्रियावासी फ्रांस मेस्मर को है। हिप्नोटिज्म शब्द का आविष्कार 19वीं शताब्दी के डॉ. जेम्स ब्रेड ने किया। सम्मोहन एक दिव्य और रहस्यमय कला है, सम्मोहन के अलग-अलग स्तर होते हैं, वास्तव में सम्मोहन काला जादू नाम की विद्या का ही एक हिस्सा है, काला जादू तंत्र शास्त्र का वो भाग होता है, जिसमें बिना मंत्र यन्त्र और औषधि आदि के मनोवांछित चमत्कार पैदा किया जा सकता है, वास्तव में तंत्र की मोहिनी विद्या का क्रिया पक्ष ही काला जादू के साधारण नाम से जाना जाता है, इस विद्या को प्रचार में नहीं लाया जाता था क्योंकि यह गुप्त विद्या कही जाती थी, किन्तु आज सम्मोहन विद्या का एक नया स्वरूप भी हमारे सामने है, जो विदेशों से आया जिसे हिप्नोटिज्म के नाम से जाना जाता है।

hipoसम्मोहन का अर्थ आमतौर पर वशीकरण से लगाया जाता है। वशीकरण अर्थात किसी को वश में करने की विद्या, जब कि यह सम्मोहन की प्रतिष्ठा को गिराने वाली बात है। वह अपने निर्णय लेने की स्वतंत्रता में नहीं होता है। हां यह बात सही भी है। लेकिन भगवान ने हम सभी में एक सम्मोहन दिया है जिसे हम समझ नहीं पाते हैं। लेकिन एक सच और है वह यह कि सम्मोहित वही होता है जो होना चाहता है। हम सब के भीतर अवचेतन मन में एक सम्मोहन क्षमता है। यही कारण है कि जब हम अपने अंतर मन की आवाज़ को वाकई सुनते हैं। ऐसा अक्सर लोगों के साथ तब होता है जब उन्हें तुरंत निर्णय लेना होता है और वह फैसला सही साबित होता है। यही कारण है कि जब हम कठिन परिस्थिति में कोई निर्णय लेते हैं तो हमें चमत्कारिक परिणाम मिलते हैं क्योंकि वही समय होता है जब चेतन मन और अवचेतन मन का संधि काल होता है। इसका कारण यही है कि उस अवस्था में हम अपने अवचेतन मन की आवाज़ सुन रहे होते हैं बस यही सम्मोहन कला है।

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