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स्ट्रेस में हैं तो कभी न करें ये काम बढ़ सकती है परेशानी 

स्ट्रेस में हैं तो कभी न करें ये काम बढ़ सकती है परेशानी 

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आज के दौर में सबसे बड़ी समस्या है तनाव। भाग दौड़ भरे जीवन में हर कोई तनाव यानी स्ट्रेस से जूझ रहा है। इसके कारण लोग कई और बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। अगर आप ऐसा सोचते हैं कि तनाव से दिमागी रोग जैसे डिप्रेशन और घबराहट होती है तो आप गलत है।  इसका शारीरिक सेहत पर भी बहुत बुरा असर पड़ता है जैसे कि ओबेसिटी, पाचन रोग, इम्‍युनिटी कम होना और कुछ तरह के कैंसर के लिए भी तनाव  ही ज़िम्‍मेदार होता है। हम तनाव को दूर करने के लिए कुछ ने कुछ करते हैं पर कई बार हम ध्यान भटकाने के लिए कुछ ऐसा करते हैं जिससे फायदा कम नुकसान अधिक होता है। जानते हैं ऐसी स्थिति में क्या न करें….
अकसर लोग तनाव के दौरान टीवी देखना शुरु कर देते हैं। इससे व्‍यक्‍ति आलसी और शिथिल बन सकता है जिसकी वजह से उसका मन काम में नहीं लगता है और काम बढ़ने की वजह से तनाव और ज़्यादा हो जाता है। ये समय की बर्बादी भी है।
अधिकतर लोग स्‍ट्रेस को कम करने लिए सिगरेट पीने का बहाना बनाते हैं। उन्‍हें लगता है कि इससे स्‍ट्रेस कम होता है। हालांकि, हम सभी जानते हैं कि सिगरेट पीने से शरीर और दिमाग को बस नुकसान ही पहुंचता है। इससे कोर्टिसोल हार्मोन का स्‍तर बढ़ जाता है जिससे स्थिति और खराब हो जाती है। इसके अलावा सेहत पर भी इसके कई नकारात्‍मक असर पड़ते हैं।
 तनावपूर्ण या खुद को तकलीफ देने वाली चीज़ों के बारे में सोच-सोचकर हम खुद की हालत और ज्‍यादा खराब कर लेते हैं। वहीं दूसरी ओर कुछ परिस्थितियों को नज़रअंदाज़ करने से भी स्‍ट्रेस होता है जोकि अच्‍छी बात नहीं है।बार-बार ऐसी चीज़ों के बारे में सोचने से तनाव बढ़ भी जाता है और आपकी स्थिति और भी ज़्यादा खराब हो जाती है।
कभी-कभी पिज़्जा, चॉकलेट या चिप्‍स आदि जैसी अनहेल्‍दी चीज़ें खाना चल जाता है। अगर आप स्‍ट्रेस में हैं तो ऐसी चीज़ों से आपको बेहतर महसूस होने लगता है लेकिन ये सब कुछ ही समय के लिए होता है क्‍योंकि इससे दिमाग में एंडोर्फिन हार्मोन बढ़ जाता है।
जब आप किसी परिस्थिति को लेकर बहुत ज़्यादा तनाव लेते हैं तो इसकी वजह से बेचैनी और कंफ्यूज़न होने लगती है। ऐसे में आपको आराम से बैठकर उस स्थिति का विश्‍लेषण करना चाहिए। उसके फायदे और नुकसान के बारे में सोचकर आप उसका एक सही हल निकाल सकते हैं।
अपने नज़दीकियों या थेरेपिस्‍ट से अपने तनाव या तनाव के कारण के बारे में बात करने से स्‍ट्रेस कम हो सकता है। अपने दिल की बात कहने से मन हल्‍का हो जाता है लेकिन अगर आप कई लोगों से अपने दिल की बात को साझा करते हैं तो इससे आपका स्‍ट्रेस और बढ़ सकता है। हर कोई आपकी मुश्किल को नहीं समझ सकता है। 

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