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पढ़ें…आखिर बैंच पर क्यों सोने को मजबूर IGMC के रेजिडेंट Doctor

पढ़ें…आखिर बैंच पर क्यों सोने को मजबूर IGMC के रेजिडेंट Doctor

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 शिमला। 36 घंटे इमरजेंसी ड्यूटी और अलग से कोई कमरा नहीं, आराम करने के लिए बैंचों का सहारा। जी हां ऐसी ही समस्या से इंडिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेजिडेंट डॉक्टरों को दो चार होना पड़ रहा है। डॉक्टरों पर अस्पताल प्रशासन की लापरवाही भारी पड़ रही है। आलम यह है कि अस्पताल प्रशासन की ओर से छह चिकित्सकों का एक ही कमरा दिया हुआ है।स एक कमरे में छह डॉक्टरों को दो घंटे तक आराम करना मुश्किल हो रहा है। वहीं इमरजेंसी ड्यूटी देने वालों में महिला व पुरुष डॉक्टर दोनों ही होते हैं। ऐसे में मजबूरन डॉक्टरों को बैंचों पर दो घंटे आराम करना पड़ रहा है। इस बारे में रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन अस्पताल प्रशासन व प्रधानाचार्य को कई बार अवगत करवा चुकी है।

अस्पताल प्रशासन के अधिकारियों का यही कहना होता है कि डॉक्टरों को कमरा दे दिया जाएगा। लेकिन, छह माह से डॉक्टरों को कमरा नहीं मिल पाया है। आरडीए अध्यक्ष डॉ. अजय जरियाल का कहना है कि अस्पताल प्रशासन से कई बार डॉक्टरों के ड्यूटी के घंटों को कम करने की मांग की जा चुकी है। न तो यह मांग पूरी की जा रही है और न ही कमरा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 36 घंटे की लगातार ड्यूटी में हर एक रेजिडेंट डॉक्टर को दो घंटे के लिए सोने का समय दिया जाता है। पर कमरा न होने के कारण डॉक्टरों को बैंचों पर सोना पड़ रहा है। आरडीए ने अस्पताल प्रशासन से मांग की है कि रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए कमरे दिए जाएं, ताकि वह दो घंटे भी आराम से अपनी नींद पूरी कर सकें। उन्होंने कहा कि अगर जल्द ही इस मांग को पूरा नहीं किया गया तो हड़ताल पर जाने जैसा कदम उठाया जा सकता है।

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