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इस दरगाह में जहरीले बिच्छू भी नहीं मारते हैं डंक, जानिए क्या है इसके पीछे का राज

इस दरगाह में जहरीले बिच्छू भी नहीं मारते हैं डंक, जानिए क्या है इसके पीछे का राज

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नई दिल्ली। जहरीले बिच्छू हाथ में लेने के बाद भी किसी को न काटें ऐसा तो कभी आपने सुना नहीं होगा।हम आज आपको ऐसी दरगाह के बारे में बताने जा रहे हैं जहां बहुत सारे जहरीले बिच्छू तो हैं लेकिन वह किसी को काटते नहीं। उत्तर प्रदेश के अमरोहा में यह दरगाह स्थित है। इस दरगाह की छतों, दीवारों और आसपास के बागीचे के पेड़ों की जड़ों के पास से मिट्टी हटाने पर ढेरों बिच्छू निकलते हैं। ये बिच्छू यहां आने वालों को तो नहीं काटते लेकिन दरगाह के बाहर निकलते ही वे आदमी को डंक मार लेते हैं।

माना जाता है कि कोई व्यक्ति इन बिच्छुओं को सप्ताह या दस दिन के लिए बाबा से इजाजत लेकर दरगाह से बाहर कहीं ले जाता है तो वे उसे कुछ नहीं करते, लेकिन निर्धारित अवधि पूरी होते ही वे उसे तुरंत डंक मार लेते हैं। इसके पीछे की कहानी हम आपको बताने जा रहे हैं।

कहा जाता है कि करीब 800 साल पहले ईरान से सैयद सरबुद्दीन सहायवलायत ने अमरोहा में आकर डेरा डाला था। यहां पहले से रह रहे बाबा शाह नसरुद्दीन ने इस पर एतराज जताया और एक कटोरे में पानी भरकर उनके पास भेजा।सरबुद्दीन ने कटोरे के ऊपर एक फूल रखकर उसे वापस कर दिया और कहा कि हम इस शहर में ऐसे रहेंगे जैसे कटोरे में पानी के ऊपर फूल। इस पर बाबा शाह नसरुद्दीन ने सरबुद्दीन को बद्दुआ दी और कहा कि इस दरगाह में बिच्छू निवास करेंगे और शहर के खोए हुए गधे, घोड़े यहां मिलेंगे। इसके उत्तर में सरबुद्दीन ने हुक्म दिया कि आज से इस दरगाह में बिच्छू किसी को काटेंगे नहीं और इसकी सीमा के भीतर कोई भी गधा, घोड़ा पेशाब या लीद आदि नहीं करेगा। इसके बाद सैयद सरबुद्दीन सहायवलायत बिच्छू वाले बाबा के नाम से जाने जाने लगे और लोग यहां दूर-दूर से मन्नत मांगने आते हैं।

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