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बिक्रम ठाकुर ने GST Council  की बैठक में लिया भाग, 216 करोड़ शीघ्र जारी करने का किया आग्रह

बिक्रम ठाकुर ने GST Council  की बैठक में लिया भाग, 216 करोड़ शीघ्र जारी करने का किया आग्रह

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शिमला। 40वीं जीएसटी काउंसिल (GST Council)  की बैठक का आयोजन आज नई दिल्ली में हुआ, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री एवं जीएसटी काउंसिल की अध्यक्ष निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने की। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर (Anurag Thakur) भी बैठक में उपस्थित थे। राज्य सरकार की ओर से उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से बैठक में भाग लिया। उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ने हिमाचल प्रदेश को उदार सहायता प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश एक छोटा राज्य है, जिसकी आर्थिकी काफी हद तक पर्यटन पर निर्भर करती है। कोविड-19 के कारण लॉकडाउन होने से राज्य में पर्यटन गतिविधियों को नुकसान पहुंचा है तथा राज्य में खनन गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं। उन्होंने कहा कि जनवरी माह तक राज्य को हुए जीएसटी नुकसान भरपाई के लिए 612 करोड़ रुपए प्राप्त हुए। उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री से मार्च माह तक के 216 करोड़ रुपए भी शीघ्र जारी करने का आग्रह किया।


एमएसएमई के लिए की गई घोषणाओं से हिमाचल को होगा फायदा

बिक्रम सिंह ने राष्ट्र के लिए घोषित 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज (Economic Package) के लिए केंद्र सरकार का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) द्वारा घोषित यह पैकेज समाज के कमजोर वर्गों, मध्यम, लघु एवं सूक्ष्म उद्योगों, व्यवसायियों, श्रमिकों तथा आमजन के लिए वरदान सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के लिए की गई घोषणाओं से हिमाचल प्रदेश को बहुत लाभ होगा और औद्योगिक उत्पादन भी बढ़ेगा।

यह भी पढ़ें: GST परिषद की 40वीं बैठक: छोटे Taxpayers के लिए राहत का एलान, जानिये अन्‍य फैसले

बिक्रम सिंह ने कहा कि वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में लगभग 55 हजार एमएसएमई औद्योगिक इकाइयां हैं जो कुल इकाइयों का 98 प्रतिशत है। एमएसएमई की रोजगार सृजन में 93 प्रतिशत भागीदारी है। कुल औद्योगिक उत्पादन में एमएसएमई का हिस्सा 85 प्रतिशत है। इस तरह हिमाचल प्रदेश एक एमएसएमई राज्य है। बिक्रम सिंह ने कहा कि एमएसएमई उद्योगों को तीन लाख करोड़ रुपए का कर्ज चार सालों में वापस करना होगा। कर्ज में डूबे लघु उद्योगों को 20 हजार करोड़ रुपए का कर्ज दिया जाएगा जिसके लिए किसी तरह की गारंटी की आवश्यकता नहीं होगी। इससे उद्यमियों को कच्चे माल की आपूर्ति तथा अन्य खर्चों के लिए धन उपलब्ध हो पाएगा और वे अपना कारोबार बढ़ा सकेंगे।

200 करोड़ रुपए तक का टैंडर अब ग्लोबल टेंडर नहीं होगा

उन्होंने कहा कि 200 करोड़ रुपए तक का टेंडर अब ग्लोबल टेंडर (Global Tender) नहीं होगा। इससे घरेलू औद्योगिक उत्पादन बढ़ेगा और इसका सीधा लाभ एमएसएमई (MSME) इकाइयों को होगा। 31 अक्तूबर, 2020 तक कोई गारंटी फीस नहीं होगी। इससे 45 लाख इकाइयों को लाभ मिलेगा। फंड ऑफ फंड्स की घोषणा से अच्छे काम करने वाली इकाइयों को प्रोत्साहन मिलेगा। उद्योग मंत्री ने कहा कि ई-मार्केट लिंक की उपलब्धता से एमएसएमई की इकाइयों को अपने उत्पाद की बिक्री में सुविधा मिलेगी। सीएम के प्रधान सचिव जेसी शर्मा व अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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