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ये क्या…शूलिनी मेले में कलाकारों का अपमान

ये क्या…शूलिनी मेले में कलाकारों का अपमान

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राष्ट्रपति अवॉर्ड से सम्मनित जिया लाल ठाकुर व अन्य ने लगाया आरोप

सोलन। संगीत के क्षेत्र में राष्ट्रपति अवॉर्ड से सम्मनित और वैदिक परंपरा के शोधकर्ता जियालाल ठाकुर सहित कई अन्य स्थानीय कलाकारों द्वारा जिला प्रशासन पर शूलिनी मेला में कलाकारों के अपमान का आरोप लगाया है। उन्होंने पत्रकार वार्ता में मेला से पूर्व ली गई स्वर परीक्षा के स्तर पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि स्वर परीक्षा लेने के लिए ऐसे लोगों की कमेटी बनाई गई थी, जिन्हें संगीत की बिल्कुल भी ज्ञान नहीं था।

चयन समिति को चलेंज, वैदिक परंपरा में बंधी संस्कृति का  दें जवाब

ठाकुर ने कहा कि उनकी परीक्षा एसडीएम सोलन व एक स्कूल की प्रिंसिपल ने बिना माइक व वाद्य यंत्रों से ली। जबकि वह 1985 से आकाशवाणी शिमला में बतौर कलाकार कई गीत गा चुके हैं। उन्होंने कहा कि वह अब अपनी लोक गायकी के आधार पर प्रदेश के लिए तीन अवॉर्ड ला चुके हैं और प्रदेश में गोल्ड मैडलिस्ट भी रह चुके हैं। उन्होंने स्वर परीक्षा की चयन समिति को चलेंज करते हुए कहा कि यदि वह वैदिक परंपरा में बंधी संस्कृति का जबाव दे दें तो वह गाना गाना छोड़ देंगे।

पहाड़ी गायक कुलदीप शर्मा पर निशाना साधते हुए कलाकारों ने कहा कि उसने लोक संस्कृति का विनाश किया है, बावजूद उसके जिला प्रशासन ने उसे पैराशूट के माध्यम से मौका दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोक संस्कृति के विनाशक को प्रशासन हजारों रुपये की राशि बतौर प्रोत्साहन देती है, जबकि जो लोग सही में लोक संस्कृति के संरक्षण और उसे बढ़ावा देने पर कार्य कर रहे हैं, उसकी कीमत मात्र 1100 रुपये रह गई है।

सांउड सिस्टम पर भी उठाए सवाल

कलाकारों ने शूलिनी मेला के दौरान सांउड सिस्टम पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सांउड सिस्टम ठेकेदारी पर दिया गया, जबकि उन्हें संगीत की नॉलेज नहीं थी। उन्होंने कहा कि जब कई कलाकारों ने उनसे कहा कि वे 12 मात्रा व 16 मात्रा का गाना गाएंगे तो वे सांउड सिस्टम वालों को इसका पता ही नहीं था। इस कारण स्टेज पर भी कलाकारों का अपमान हो गया।

डॉ. केएल सहगल का किया अपमान

जिया लाल ठाकुर ने कहा कि डॉ. केएल सहगल एक ऐसे कलाकार हैं, जिन्होंने अब तक संगीत में कम से कम 12 गायकों को पीएचडी करवा दी हैं। यहां तक की शूलिनी मेला का स्टार कलाकार भी उपेंद्र युवी भी उनका शिष्य रह चुका है। मेला कमेटी ने ऐसे कलाकारों का भी अपमान किया है। इस कारण उन्होंने मेला में परफोरमेंस नहीं दी गई।

सिर्फ नाट्कों के लिए रह गए

कलाकारों ने यह भी आरोप लगाए कि जब सरकारी योजनाओं को गांव-गांव में पहुंचाना होता है तो हमें बुलाया जाता है। उन्होंने दुख जताया कि जिन कलाकारों ने सरकार की उपलब्धियों को नाच गाकर व नाटक के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाई उन्हें ही स्वर परीक्षा से बाहर कर दिया गया।

ये रहे मौजूद

पत्रकार वार्ता में जिया लाल ठाकुर के अलावा जय प्रकाश शर्मा, गगन, सतीश कुमार, प्रिया, राजेंद्र शर्मा, लक्ष्मी दत्त शर्मा, नरेश कुमार, कमला, हेमंत, सोनू, यशपाल, सुमन, रीता ठाकुर, लता कश्यप, मोनिका,सुनीता, सुनील, सतेंद्र रमेश, विरेंद्र, नीतिन तोमर, कुनाल,नीलम, किरण, गीत शर्मा, ममता व साहिल मौजूद रहे।

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