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ऊर्जा से होकर ही जाता है तरक्की का रास्ता

ऊर्जा से होकर ही जाता है तरक्की का रास्ता

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Energy Day : प्रकृति के संसाधनों को सुरक्षित करना हमारी जिम्मेदारी है इसलिए जो भी साधन प्रकृति ने हमें दिए हैं। उनके प्रति जागरूक और विवेकशील होते हुए अपनी जीवन शैली को नियंत्रित करना है। ऊर्जा की बचत, पैसे और स्वयं ऊर्जा की बचत है। आधुनिकता के दौर में जमाना स्पीड पर निर्भर है। पहले यातायात ज्यादातर नहीं के बराबर हुआ करते थे पर अब स्थितियां और हैं। ऊर्जा की बढ़ती खपत को देखते हुए भारत सरकार ने 2001 में ऊर्जा संरक्षण अधिनियम लागू किया था। इस अभियान में ऊर्जा के गैरपारंपरिक स्रोतों को इस्तेमाल में लाने और पारंपरिक स्रोतों के संरक्षण के नियम बनाए गए थे। मूल उद्देश्य यही है कि ऊर्जा के अनावश्यक प्रयोग को बंद कर ऊर्जा की बचत की जाए।


यह एक प्रसन्नता का विषय है कि फिलहाल भारत एक ऐसा देश है, जहां पूरे साल सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा का इस्तेमाल किया जा सकता है। भारत में लगभग 300 दिनों तक धूप खिली रहती है। सौर ऊर्जा के लिए धूप, उपलब्ध भूमि, परमाणु ऊर्जा के लिए थोरियम का विशाल भंडार और पवन ऊर्जा के लिए लंबा समुद्री किनारा उसके पास उपलब्ध हैं। देश में वैसे ही बिजली का संकट लगातार गहराता जा रहा है। हमारे देश की ऊर्जा की मांग और आपूर्ति में काफी अंतर है। एक बात तो साफ है कि तरक्की का रास्ता ऊर्जा से होकर ही जाता है।

ऐसे में वैकल्पिक ऊर्जा की व्यवस्था होनी चाहिए। वैकल्पिक ऊर्जा के उपायों में सौर ऊर्जा अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह प्रदूषण रहित है और निर्बाध गति से मिलने वाला सबसे सुरक्षित ऊर्जा स्रोत है और अपने देश में बारहों मास उपलब्ध है। विकास को गति देने के लिए ऊर्जा की मांग बढ़ती जा रही है। उसे पुरानी बिजली परियोजनाएं पूरी नहीं कर पा रही हैं और नई परियोजनाओं के लिए स्थितियां दूभर हैं। अगर इस संकट को दूर करने के लिए उपाय नहीं किए गए तो भविष्य संकटमय साबित होगा।

खनिज तेल ,पेट्रोलियम औऱ उत्तम गुणवत्ता वाले कोयले जैसे प्राकृतिक साधन हमारे यहां बहुत कम हैं। ऊर्जा की बचत के बिना हम विकसित राष्ट्र का सपना नहीं देख सकते। इसलिए जरूरी है कि इस बचत के लिए हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझे। यह बचत हम 100 वॉट के बल्ब की जगह सी एफ एल का प्रयोग कर 75 से 80 प्रतिशत तक की ऊर्जा बचा सकते हैं। ये बल्ब की तुलना में जयादा चलते भी हैं इस लिए इन्हें प्राथमिकता दें। आवासीय सड़क बत्तियों के लिए फोटो इलेक्ट्रिक कंट्रोल स्विच का इस्तेमाल करें।

भवन के आसपास वृक्ष-लताएं आदि लगा कर हरियाली बनाए रखें इससे कड़ी धूप के प्रभाव से बचे रहेंगे और एसी या कूलर का खर्च भी कम होगा। जिस रोशनी की जरूरत न हो उसे जलता न छोड़ें न ही फालतू में पंखा चलने दें। कोई भी धार्मिक आयोजन दिन में ही करें। घरेलू पंखों और ट्यूब लाइट्स पर जमी धूल साफ करते रहें तो खपत कम होगी। सोचिए अगर अब न बचाया तो भविष्य में किस ऊर्जा का इस्तेमाल करेंगे हम ?

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