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सदन में गूंजा स्वास्थ्य सुविधाओं का मुद्दा, आशा-पठानिया ने सरकार के प्रयासों पर उठाए सवाल

सदन में गूंजा स्वास्थ्य सुविधाओं का मुद्दा, आशा-पठानिया ने सरकार के प्रयासों पर उठाए सवाल

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शिमला। विधानसभा में बजट सत्र के तीसरे दिन सदन में स्वास्थ्य सुविधाओं का मुद्दा गूंजा। डलहौजी की विधायक आशा कुमारी ने शिमला में केंसर अस्पताल में टर्शरी केयर सेंटर (tertiary care center) खोले जाने और इसके लिए दी कई धन राशि के लेप्स होने पर सवाल पूछा। इसी के सप्लीमेंट्री सवाल में नूरपुर के विधायक राकेश पठानिया ने भी टर्शरी केयर सेंटर को लेकर अपनी सरकार को घेरा। पठानिया ने इसके लिए विभाग के प्रवासों को नाकाफी बताया।

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इसके जवाब में स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह ने कहा कि भारत सरकार से इसके लिए 90:10 अनुपात में 45 करोड़ राशि मिली है जिसमें 30 प्रतिशत मशीनरी और 70 फीसदी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च होना है। भवन निर्माण कें लिये नक्शा जमा किया गया था, ज़रूरी औपचारिकताएं पूरी की जा रही है। इसमें कैंसर अस्पताल के लिए 16.52 करोड़ की राशि भी प्राप्त हो चुकी है। सुपर स्पेशियलिटी का कार्य शिमला के चम्याना में शुरू किया गया है। कुछ मुद्दे एनजीटी के पास लंबित है, उसको जल्द पूरा किया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि रेडियो थेरेपी विभाग में डॉक्टरों कई कमी को जल्द पूरा किया जा रहा है। कुछ डॉक्टर विशेषज्ञता हासिल कर रहें हैं, जल्द ही डिग्री पूरी होने के बाद उनको इन सेवाओं में लगाया जाएगा ।

टांडा में हो रहा है कैंसर का प्रभावी इलाजः परमार

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि कैंसर अस्पताल के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई है। कैंसर अस्पताल में 2200 से 2500 मरीज महीने में आते हैं, जिनके लिए किसी तरह की स्टाफ या डॉक्टरों की कमी नहीं है। प्रदेश के 10 अस्पतालों में कीमोथैरेपी की जा रही है और इसके लिए ट्रेंड डॉक्टरों को नियुक्त किया गया है। अपैक्स सेंटर मुंबई की गाइडलाइन के मुताबिक ही काम किया जा रहा है। टांडा के भी जल्दी ही लीनियर एक्सीलेरेटर स्थापित करने का काम प्रगति पर है। परमार ने कहा कि जिन बीमारियों का इलाज शिमला और टांडा में नहीं हैं उन्हीं से पीड़ित मरीजों को चंडीगढ़ या बाहर भेजा जाता है ।

नूरपुर के विधायक के सप्लीमेंट्री के जवाब में स्वाथ्य मंत्री ने कहा कि कांगड़ा के टांडा में कैंसर का प्रभावी ईलाज किया जा रहा है। लेकिन कैंसर के ईलाज कई माध्यमों से किया जाता है। प्रदेश में ज्यादातर लंग्स और ब्रेस्ट कैंसर के मरीज ज्यादा संख्या में आ रहे है। इसी प्रश्न पर किन्नौर के विधायक जगत सिंह नेगी ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े कर दिए और प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

डॉक्टरों को रोकने के लिए ले रहे हैं बैंक गारंटी

इसी सवाल में माकपा नेता राकेश सिंघा ने भी स्वास्थ्य मंत्री से ओन्कोलोजी और कैंसर के ईलाज के लिए सरकार क्या कर रही है। जब बीमारियां बढ़ रही है क्या उसी अनुपात में डॉक्टरों की नियुक्ति हो रहीं है या नहीं। सिंघा ने सरकार से ये जानना चाह कि सरकार डॉक्टरों से पढ़ाई के दौरान बैंक गारंटी लेकर इस पढ़ाई को बाधित कर रहें है या उत्साहित कर रहें है? स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि बैंक गारंटी लगाना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि ज्यादातर डॉक्टर हिमाचल में पढ़ाई करने के बाद प्रदेश से बाहर सेवाएं देने चले जातें है। इसको रोकने के लिए ये व्यवस्थाएं की गई है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि हिमाचल में डिग्री करने बाद अभी तक 35 डॉक्टर हिमाचल छोड़ कर बाहर गए हैं।

सीएम जयराम ठाकुर ने इसी मामले पर हस्तक्षेप करते हुए सदन में बताया कि डॉक्टरों और विशेषज्ञों के लिए 10 लाख की बैंक गारंटी को बीते कल की ही कैबिनेट में घटाकर 5 लाख किया गया है, ताकि डाक्टरों के पलायन और डिग्री करने में पेश आ रही परेशानियों को कम किया जा सके।

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