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पहले बाहर से मंगवाते थे किसान अनाज, अब पांच गुणा बढ़ गई अन्न की पैदावार

पहले बाहर से मंगवाते थे किसान अनाज, अब पांच गुणा बढ़ गई अन्न की पैदावार

पहले बाहर से मंगवाते थे किसान अनाज, अब पांच गुणा बढ़ गई अन्न की पैदावार

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ऊना। हिमाचल प्रदेश सरकार और जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) के सहयोग से राज्य में क्रियान्वित जायका परियोजना ने ऊना जि़ला के बडसाला गांव के किसानों की तकदीर बदल कर रख दी है। पहले, जिस इलाके में बाहर से अनाज मंगवाना पड़ता था, अब उसी गांव के किसान अपने उत्पाद बेच कर भारी मुनाफा कमा रहे हैं। गौरतलब है कि मई, 2017 में जायका परियोजना के तहत बडसाला में स्थापित नलकूप से किसानों के खेतों को सिंचाई की सुविधा मुहैया करवाई गई। जायका की इस उप-परियोजना में गाँव में लगभग 46 लाख रुपये की लागत से निर्मित नलकूप सिंचाई योजना से 14.37 हैक्टेयर भूमि को सिंचाई की सुविधा प्राप्त हुई। इस सिंचाई परियोजना के निर्माण के बाद किसानों की गेहूं और मक्की की उपज में आशातीत बढ़ोतरी हुई।


 

कृषि मंत्री वीरेंद्र कंवर ने जायका परियोजना के बारे में बताया कि जायका का पहला चरण दिसंबर, 2020 में समाप्त होने जा रहा है। 321 करोड़ रुपए की जायका परियोजना के पहले चरण को पांच जि़लों बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी और ऊना में लागू किया गया था। इसके तहत किसानों को सब्ज़ी एवं अनाज उगाने और कटाई के बाद की प्रबंधन तकनीक के बारे में प्रशिक्षण प्रदान किया गया। परियोजना के तहत खेतों तक सिंचाई और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। जायका के दूसरे चरण में 1104 करोड़ रुपये की परियोजना वित्त पोषित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके लिए जायका के साथ मार्च, 2021 में समझौता पत्र पर हस्ताक्षर होना प्रस्तावित हैं। निश्चित रूप से पूरे प्रदेश के किसान इससे लाभान्वित होंगे।
ध्यात्व है कि बडसाला में जायका परियोजना लागू होने से पहले खरीफ सीज़न में एक हैक्टेयर में औसतन 18 क्विंटल पैदावार होती थी; लेकिन सिंचाई सुविधा मिलने के बाद वर्ष, 2019 के खरीफ सीज़न में पैदावार बढक़र अब 32 क्विंटल प्रति तक हैक्टेयर पहुंच गई है। वर्ष 2019-2020 के रबी सीज़न में प्रति हैक्टेयर 41 क्विंटल गेहूं की पैदावर हुई; जबकि पहले यह औसतन महज़ 15 क्विंटल ही थी। वर्ष, 2019 में खरीफ सीज़न के दौरान गाँव की 2.40 हैक्टेयर भूमि और रबी सीज़न में 4.55 हैक्टेयर क्षेत्र पर सब्ज़ी उगाई गई। किसानों ने आलू के साथ अरबी, भिंडी, प्याज़ आदि की खेती शुरू की। किसानों के दो हैक्टेयर भूमि पर कच्चा आलू लगाने से उन्हें भारी मुना$फा हुआ।

जायका ब्लॉक परियोजना के प्रबंधक कुलभूषण धीमान बताते हैं कि उप-परियोजना के तहत बडसाला के किसानों को सिंचाई की सुविधा प्रदान करने के साथ बीज, उपकरण तथा प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। इन सब उपायों के चलते किसानों की आय में लगभग पाँच गुना तक वृद्धि दर्ज की गई। पहले उन्हें प्रति हैक्टेयर लगभग 52,552 रुपए तक की आय होती थी, जो वर्ष 2019-20 में बढ़ कर 2,71,197 रुपए प्रति हैक्टेयर हो गई।बडसाला के किसान मुकेश कुमार ने बताया कि गांव में जायका परियोजना के आने के बाद अब किसान आलू तथा दूसरी सब्जि़यां उगाते हैं और बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं। परियोजना में सिंचाई की सुविधा के अलावा बीज, उपकरण और प्रशिक्षण भी मुहैया करवाया जा रहा है। एक अन्य किसान सोढी राम कहते हैं कि जायका से पूरे गांव को लाभ पहुँचा है। पहले हमें बाहर से अनाज खरीदना पड़ता था, अब गांव में इतनी पैदावार हो रही है कि गेहूं बाहर बेचा जाता है। इसके अलावा किसान सब्जि़यों की बिक्री से भी लाभ उठा रहे हैं। परियोजना के तहत किसानों को प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया, जिससे उन्हें खेती-बाड़ी की बारीकियां समझने में मदद मिली।

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