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जब आधी रात के बाद भी खुला रहा न्याय का मंदिर 

जब आधी रात के बाद भी खुला रहा न्याय का मंदिर 

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मुंबई। पेंडिंग मामलों को निबटाने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट के एक जज ने शुक्रवार रात साढ़े 3 बजे तक कोर्ट रूम में सुनवाई की। कोर्ट नंबर 20 में बैठे जस्टिस एस जे कथावाला ने आगामी महीने भर के समर वेकेशन को देखते हुए अपने पास लंबित बेहद जरूरी मामलों की सुनवाई देर रात तक करने का फैसला किया और हाई कोर्ट के इतिहास में पहली बार देर रात तक सुनवाई की। 


हाई कोर्ट के 156 साल के इतिहास में यह पहली बार था की शाम को 5.30 बजे बंद हो जाने वाले कोर्ट रूम के दरवाजे देर रात तक खुले रहे। इस एतिहासिक पल को देखने के लिए वकीलों और याचिकाकर्ताओं में भी गजब का उत्साह दिखा। वे अपने मोबाइल फोन से देर रात तक चली कोर्ट की कार्रवाई की तस्वीरें खींचते रहे और सोशल मीडिया पर पोस्ट करते रहे।

कई वकीलों ने कहा कि उन्होंने अपने जीवनकाल में कोर्ट का ऐसा नजारा कभी नहीं देखा। एक जस्टिस कथावाला के कोर्ट में जमीन के मामले की सुनवाई के लिए पहुंचे वकील आशीष मेहता ने कहा की वे अपने मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद भी कोर्ट में इसलिए हाजिर रहे क्योंकि उन्हें इस ऐतिहासिक पल को देखना था।

जिन वकीलों की जस्टिस कथावाला के कोर्ट में सुनवाई थी वे भी बिना ब्रेक के कोर्ट परिसर में मौजूद रहे, ताकि उनके मामलों की भी समय पर सुनवाई पूरी हो सके। कुछ युवा वकीलों ने जस्टिस कथावाला के प्रयास की सराहना करते हुए इसे अपने लिए एक मिसाल बताया।

शुक्रवार को देर रात तक सुनवाई करने के बाद भी जस्टिस कथावाला शनिवार सुबह जल्दी कोर्ट पहुंच गए और लंबित मामलों की फिर सुनवाई में जुट गए। वैसे कुछ वकीलों को जस्टिस कथावाला के फैसले पर मलाल भी था। उनका कहना था कि इस तरह के फैसलों से उन पर काम का दबाव बढ़ जाता है। दशकों से हाई कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे वकील VP Patil ने कहा कि जब कोर्ट का समय 11 बजे से 5 बजे तक का है तो फिर देर रात तक सुनवाई क्यों? अगर कोर्ट के बाकी जज भी ऐसा ही फैसला ले लें तो सोचिये क्या परेशानी होगी?

जस्टिस कथावाला ने विल्सन कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद मुंबई में ही गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से LLB किया और कुछ साल एडिशनल जज रहने के बाद वे जुलाई 2008 में हाई कोर्ट के जज बने। उन्हें 15 जुलाई 2011 को हाई कोर्ट का स्थाई जज बना दिया गया।

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