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कलंक चतुर्थी पर न करें चांद का दीदार

कलंक चतुर्थी पर न करें चांद का दीदार

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कलंक चतुर्थी के दिन मान्यता है कि चंद्र दर्शन नहीं करना चाहिए। साधारण रास्ते में बने गड्ढे के पानी में चंद्रमा को देखने से झूठे आरोप लगने की संभावना तो रहती ही है, परंतु अगर गोखुर से बने गड्ढे में पानी भरा हो और उसमें इस दिन चांद दिख जाए तो ऐसा झूठा कलंक लगता है जिससे छूटना मुश्किल ही होता है। दुर्भाग्य से ऐसी स्थिति बन ही जाए तो स्यमंतक मणि की कथा पढऩी या सुननी चाहिए। इसी के साथ भगवान गणेश की पूजा करने से कुछ हद तक दोष कम हो जाता है।

moon-1चांद की हंसी
एक बार ब्रह्माजी ने चतुर्थी के दिन गणेशजी का व्रत किया था। गणेशजी ने प्रकट होकर वर मांगने को कहा तो उन्होंने मांगा कि मुझे सृष्टि की रचना करने का मोह न हो। गणेशजी ज्यों ही तथास्तु कहकर चलने लगे, उनके विचित्र व्यक्तित्व को देखकर चंद्रमा ने उपहास किया। इस पर गणेशजी ने रुष्ट होकर चंद्रमा को शाप दिया कि आज से कोई तु हारा मुख नहीं देखना चाहेगा चंद्रमा मानसरोवर की कुमुदिनियों में जा छिपा। चंद्रमा के बिना प्राणियों को बड़ा कष्ट हुआ। ब्रह्माजी की आज्ञा से सारे देवताओं के व्रत से प्रसन्न होकर गणेशजी ने वरदान दिया कि अब चंद्रमा शाप से मुक्त तो हो जाएगा, पर भाद्रपद गणेश चतुर्थी को जो भी चंद्रमा के दर्शन करेगा, उसे चोरी आदि का झूठा लांछन जरूर लगेगा।

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