Covid-19 Update

2,05,499
मामले (हिमाचल)
2,01,026
मरीज ठीक हुए
3,504
मौत
31,526,622
मामले (भारत)
196,707,763
मामले (दुनिया)
×

भगवान गणेश का रूप है कलश

भगवान गणेश का रूप है कलश

- Advertisement -

‘कलशस्य मुखे विष्णु कंठे रुद्र समाश्रिताः

kalash: पावन पर्व नवरात्रों में दुर्गा मां के नव रूपों की पूजा नौ दिनों तक चलती है। नवरात्र के आरंभ में प्रतिपदा तिथि को उत्तम मुहूर्त में कलश या घट की स्थापना की जाती है। कलश को भगवान गणेश का रूप माना जाता है जो की किसी भी पूजा में सबसे पहले पूजनीय है इसलिए सर्वप्रथम घट रूप में गणेश जी को बैठाया जाता है ।
कलश का पात्र जलभरा होता है। जीवन की उपलब्धियों का उद्भव आम्र पल्लव, नागवल्ली द्वारा दिखाई पड़ता है। जटाओं से युक्त ऊंचा नारियल ही मंदराचल है तथा यजमान द्वारा कलश की ग्रीवा (कंठ) में बांधा कच्चा सूत्र ही वासुकी है। यजमान और ऋत्विज (पुरोहित) दोनों ही मंथनकर्ता हैं। पूजा के समय प्रायः उच्चारण किया जाने वाला मंत्र स्वयं स्पष्ट है।


कलशस्य मुखे विष्णु कंठे रुद्र समाश्रिताः
मूलेतस्य स्थितो ब्रह्मा मध्ये मात्र गणा स्मृताः।
कुक्षौतु सागरा सर्वे सप्तद्विपा वसुंधरा,
ऋग्वेदो यजुर्वेदो सामगानां अथर्वणाः
अङेश्च सहितासर्वे कलशन्तु समाश्रिताः।

kalash: भाव और अर्थ 
अर्थात्‌ सृष्टि के नियामक विष्णु, रुद्र और ब्रह्मा त्रिगुणात्मक शक्ति लिए इस ब्रह्माण्ड रूपी कलश में व्याप्त हैं। समस्त समुद्र, द्वीप, यह वसुंधरा, ब्रह्माण्ड के संविधान चारों वेद इस कलश में स्थान लिए हैं।

इसका वैज्ञानिक पक्ष यह है कि जहां इस घट का ब्रह्माण्ड दर्शन हो जाता है, जिससे शरीर रूपी घट से तादात्म्य बनता है, वहीं तांबे के पात्र में जल विद्युत चुम्बकीय ऊर्जावान बनता है। ऊंचा नारियल का फल ब्रह्माण्डीय ऊर्जा का ग्राहक बन जाता है। जैसे विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए बैटरी होती है, वैसे ही मंगल कलश ब्रह्माण्डीय ऊर्जा संकेंद्रित कर उसे बहुगुणित कर आसपास विकिरित करने वाली एकीकृत कोषा है, जो वातावरण को दिव्य बनाती है।
कच्चे सूत्रों का दक्षिणावर्ती वलय ऊर्जावलय को धीरे-धीरे चारों ओर वर्तुलाकार संचारित करता है। संभवतः सूत्र (बांधा गया लच्छा) विद्युत कुचालक होने के कारण ब्रह्माण्डीय बलधाराओं का अपव्यय रोकता है। फिर भी अनुसंधान का खुला क्षेत्र है कि शोधकर्ता आधुनिक उपकरणों का प्रयोग भक्ति एवं सम्मानपूर्वक करें, ताकि कुछ और नए आयाम मिल सकें।

नवरात्र व्रतः तला-भूना नहीं पेय पदार्थों का करें सेवन

- Advertisement -

Facebook Join us on Facebook Twitter Join us on Twitter Instagram Join us on Instagram Youtube Join us on Youtube

हिमाचल अभी अभी बुलेटिन

Download Himachal Abhi Abhi App Himachal Abhi Abhi IOS App Himachal Abhi Abhi Android App

टेक्नोलॉजी / गैजेट्स / ऑटो

Himachal Abhi Abhi E-Paper


विशेष




सब्सक्राइब करें Himachal Abhi Abhi अलर्ट
Logo - Himachal Abhi Abhi

पाएं दिनभर की बड़ी ख़बरें अपने डेस्कटॉप पर

अभी नहीं ठीक है