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दक्षिण में कांजीवरम

दक्षिण में कांजीवरम

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साड़ी पारंपरिक भारतीय परिधानों में सबसे ज्यादा आकर्षक है। यही नहीं सलीके से पहनी गई साड़ी किसी भी महिला के सौंदर्य को दोगुना कर देती है। जब बात उत्सवों, त्योहारों या पारंपरिक भव्य आयोजनों की आती है, तो साड़ी ही महिलाओं की पहली पसंद होती है। अगर पूछा जाए कि दक्षिण की महिलाओं की पहचान क्या है तो उत्तर होगा लंबे, घने और काले बालों, उस पर सजी खूबसूरत वेणी और तीखे-नाक-नक्श… और… और… जी हां… कांजीवरम की खूबसूरत तथा भारी-भरकम साड़ियां। कांजीवरम वेडिंग सिल्क साड़ी है और इसके साथ यहां की महिलाएं भारी स्वर्णाभूषण ही पहनना पसंद करती हैं।

  • kanjivaram-6कांजीवरम की बुनाई का यह पारंपरिक तरीका कांचीपुरम से चलकर मद्रास या अब चेन्नई तक आया।
  • इसे मुख्यतः शादियों या समारोहों में पहने जाने वाले परिधान के रूप में ग्रहण किया गया। विशेषकर दक्षिण भारतीय परिवारों में शादी या बड़े समारोहों में कांजीवरम पहनने का चलन आज भी उतने चाव से निभाया जा रहा है।
  • कांजीवरम साड़ियों की मुख्य डिजाइन में बॉर्डर और पल्ले पर खास काम किया जाता रहा है। बीच की पूरी साड़ी या तो खाली रखी जाती थी या फिर इसमें बूटियां बुनी जाती थीं।
  • एक पतली जरी बॉर्डर तथा कुछ बूटियों वाली कांजीवरम साड़ी की कीमत लगभग 6 हजार रुपए से शुरू हो सकती है।

kanjivaram-3आजकल डिजाइनरों ने कांजीवरम की पारंपरिक डिजाइनों के साथ नए प्रयोग किए हैं, जिनमें मुख्यतौर पर वजन में कुछ हल्की साड़ियां भी बनाई गई हैं। इसके लिए इस बुनाई में जॉर्जेट, मलमल, रेशम तथा चंदेरी का मिश्रण किया गया है। इनमें कांजीवरम में सुनहरी जरी के रेशों तथा परंपरागत फूल तथा मंदिरों की डिजाइनों के साथ ही नए ग्राफिकल तथा ज्यॉमेट्रिकल डिजाइनों, एम्ब्रायडरी तथा सेल्फ प्रिंट एवं नए रंगों को भी जोड़ा गया है। इनसे आज की कॉकटेल तथा कार्पोरेट साड़ियां भी बनाई जा रही हैं।

  • kanjivaram1ऐसी एक साड़ी बुनने में लगभग 20-25 दिन लगते हैं। यही नहीं समय की मांग को देखते हुए इस बुनाई से साड़ियों के अलावा स्कर्ट, कुर्ते, टॉप तथा मिडी भी बनाए जा रहे हैं, जिन्हें विदेशों में भी पसंद किया जा रहा है।
  • दरअसल कांजीवरम एक ऐसा परिधान है जो आपको किसी गहने के पहनने का सा सुख देती है। भारी-भरकम जरी से बनी यह सुंदर कारीगरी देखते ही मन मोह लेती है। आज भी कांजीवरम का क्रेज महिलाओं में गहने खरीदने जितना ही है इसलिए आपका वॉर्डरोब एक कांजीवरम के बिना अधूरा है।
  • कांजीवरम साड़ियां एक अनूठी तथा पारंपरिक कारीगरी है। असली कांजीवरम को हमेशा असली सोने की जरी के साथ ही बुना जाता है। एक असली कांजीवरम का वजन कम से कम 500 ग्राम होता है।

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