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Pathania का वारः बातें करने वाले BJP leaders को CM का करारा जवाब

Pathania का वारः बातें करने वाले BJP leaders को CM का करारा जवाब

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धर्मशाला। बीजेपी नेता केवल मात्र बातें करते हैं, काम नहीं। जब भी कहीं विकास होता है तो बीजेपी नेता सीएम वीरभद्र सिंह पर क्षेत्रवाद की राजनीति करने का आरोप मढ़ देते हैं। अब धर्मशाला को प्रदेश की दूसरी राजधानी का दर्जा मिल गया हो तो यह उन लोगों के लिए करारा जवाब है। धर्मशाला में पत्रकार वार्ता के दौरान प्रदेश वन निगम के उपाध्यक्ष केवल सिंह पठानिया ने कहा कि बीजेपी नेता सिर्फ बातें करते आए हैं। उन्होंने नेता विपक्ष प्रेम कुमार धूमल पर पलटवार करते हुए कहा कि धूमल सीएम को सिर्फ घोषणाएं करने वाला सीएम कहते हैं। धूमल यह बताएं कि वह भी 10 वर्ष प्रदेश के सीएम रहे तो उन्होंने अपने कार्यकाल में खासकर जिला कांगड़ा के लिए क्या किया। पठानिया ने आरोप लगाया कि अपने कार्यकाल में धूमल ने जिला कांगड़ा को बांटने का ही प्रयास किया और वह प्रयास भी अधूरा ही रहा, जबकि सीएम वीरभद्र सिंह ने ऊपर और नीचे के हिमाचल का भेदभाव खत्म करते हुए पूरे प्रदेश का विकास सुनिश्चित बनाया है।

  • धर्मशाला को सेकेंड कैपिटल का दर्जा मिलने से केवल पठानिया खुश
  • कहा, वीरभद्र नहीं, धूमल कांगड़ा को बांटने की करते हैं कोशिश

पठानिया ने कहा कि सीएम ने जिला कांगड़ा के विकास की भूमिका 1984 में प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड कार्यालय खोलकर बांध दी थी। उसके बाद सीएम यहां विभागीय कार्यालय खोलते रहे और अब धर्मशाला को दूसरी राजधानी बनाकर उन्होंने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। 1995 में शुरू की गई शीतकालीन प्रवास की परंपरा भी धर्मशाला को राजधानी बनाने की दिशा में उठाया गया एक दूरगामी कदम था। पठानिया ने कहा कि धूमल ने विपक्ष में रहते हुए सीएम वीरभद्र सिंह के हर निर्णय का विरोध किया है, लेकिन सत्ता में आते ही उन्हें सीएम के पदचिन्हों पर चलने को मजबूर होना पड़ा है। इससे साफ जाहिर होता है कि प्रदेश को चलाने के लिए धूमल के पास अपनी कोई कार्ययोजना नहीं है।

वन निगम उपाध्यक्ष का कहना है कि धर्मशाला के राजधानी बनने से जिला कांगड़ा के अलावा जिला ऊना, चंबा, हमीरपुर सहित अन्य क्षेत्रों के लोगों को भी लाभ मिलेगा। यह एक साहसिक निर्णय है और ऐसे निर्णय सिर्फ सीएम वीरभद्र सिंह ही ले सकते हैं। पठानिया ने आरोप लगाया कि बीजेपी के कार्यकाल में की गई घोषणाएं कभी सिरे ही नहीं चढ़ पाई। बीजेपी के कार्यकाल में जहां तहसील बनाने की घोषणाएं हुईं वहां पर तहसीलदार तक बिठाने में बीजेपी नाकाम रही है जबकि सीएम वीरभद्र सिंह ने एक मजबूत प्रशासनिक ढांचा पूरे प्रदेश में विकसित किया है।

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