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कीरतपुर-नेरचौक फोरलेनः CM का ऐलान, DC की अध्यक्षता में बनेगी कमेटी

कीरतपुर-नेरचौक फोरलेनः CM का ऐलान, DC की अध्यक्षता में बनेगी कमेटी

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 शिमला। सीएम वीरभद्र सिंह ने सदन में ऐलान किया कि राज्य में बन रहे नेरचौक-कीरतपुर फोरलेन के चलते बिलासपुर जिले में लोगों को पेश आ रही दिक्कतों की जांच के लिए बिलासपुर के डीसी की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन होगा। उन्होंने कहा कि फोरलेन के इस कार्य में स्थानीय लोगों को रोजगार मिले, इसको वे खुद सुनिश्चित बनाएंगे। साथ ही कहा कि वे भी फोरलेन मार्ग के कार्य की प्रगति से संतुष्ट नहीं हैं। वे आज सदन में श्री नैनादेवी जी से बीजेपी विधायक रणधीर शर्मा द्वारा नियम-62 के तहत उठाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जवाब में कही।  सीएम ने कहा कि डीसी बिलासपुर की अध्यक्षता में बनने वाली कमेटी मौके का दौरा करेगी और सरकार को रिपोर्ट देगी, ताकि लोगों की समस्याओं का तुरंत हल हो सके।

  • विधायक रणधीर शर्मा के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जवाब सीएम ने कही बात

उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है की फोरलेन प्रभावितों को भी ज्यादा से ज्यादा मुआवजा मिले और फोरलेन सड़क भी बिना बाधा के बने।  इससे पहले बीजेपी सदस्य रणधीर शर्मा ने प्रश्नकाल के बाद नियम – 62 के तहत सदन में फोरलेन के निर्माण के कारण लोगों को पेश आ रही दिक्कतों का मुद्दा उठाया।


इसके अलावा वहां उड़ रही धूल से खेती भी बुरी तरह से प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि कैंची मोड़ सुरंग निर्माण की खुदाई से पानी निकल रहा है और उसमें कुछ केमिकल भी निकला है और वह सीथा पानी के स्रोतों में मिल रहा है और उससे पशु पी रहे हैं और वे बीमार हो रहे हैं।  रणधीर शर्मा ने कहा कि सरकार ने मुआवजा देने को फैक्टर दो नहीं लगाया है और उससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है।  उनका कहना था कि फैक्टर दो लागू करे तो चार गुणा मुआवजा मिलेगा, लेकिन सरकार ने फैक्टर दो लागू नहीं किया। इस कारण उन्हें कम मुआवजा मिला है और किसान निराश हैं।

सदन में सीएमः आउटसोर्स कर्मियों के लिए नीति बनाने का मामला विचाराधीन

राज्य के हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण को नीति बनाने का मामला आज विधानसभा में गूंजा। प्रश्नकाल के दौरान बीजेपी सदस्य जयराम ठाकुर के प्रश्न के उत्तर में सीएम वीरभद्र सिंह ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने के लिए नीति बनाने का मामला सरकार के विचाराधीन है।उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभागों में तैनात आउटसोर्स कर्मचारी ही इस नीति के दायरे में आएंगे, केंद्रीय विभागों के कर्मचारी नहीं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न विभागों में नियुक्त आउटसोर्स कर्मचारियों की कुल संख्या बारे सूचना अभी एकत्रित की जा रही है। उधर, बीजेपी सदस्य रिखीराम कौंडल के एक सवाल पर सीएम ने सदन में जानकारी दी कि कर्मचारी चयन बोर्ड और लोकसेवा आयोग के माध्यम से पिछले 4 सालों में प्रदेश में हुई विभिन्न नियुक्तियों बारे भी सूचना एकत्रित की जा रही है। 

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