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कपूर का वार : Virbhadra नहीं चाहते Kangra में बने CU

कपूर का वार : Virbhadra नहीं चाहते Kangra में बने CU

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धर्मशाला। सीएम वीरभद्र सिंह नहीं चाहते थे कि धर्मशाला स्मार्ट सिटी बने और इसके लिए उन्होंने कई अड़ंगे अड़ाए। वीरभद्र सिंह यह भी नहीं चाहते कि कांगड़ा में सेंट्रल यूनिवर्सिटी बने। यह आरोप पूर्व मंत्री किशन कपूर ने लगाए हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक सरकार ने जदरांगल में सीयू की जमीन को लेकर वन विभाग को अप्लाई नहीं किया है और इसे लेकर नित नए दावे किए जाते हैं। वहीं, देहरा में सीयू के लिए चिन्हित भूमि की सरकार निशानदेही नहीं करवा पाई है। कपूर ने आरोप लगाया कि सीएम सीयू के मामले को बेवजह लटका रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी सरकार से क्या उम्मीद की जा सकती है जो खुद रिटायर्ड ऑफिसर्स के सहारे चल रही हो।

एमसी शिमला के मुकाबले धर्मशाला में 25 फीसदी कर्मचारी भी नहीं

पूर्व मंत्री किशन कपूर ने नगर निगम धर्मशाला में खाली पड़े पदों को लेकर प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि जो सपने प्रदेश सरकार ने दिखाए थे उनमें से कोई भी पूरा नहीं हुआ है। प्रदेश में केवल दो ही नगर निगम हैं, लेकिन जितने कर्मचारी शिमला नगर निगम के पास हैं उससे 25 प्रतिशत भी धर्मशाला नगर निगम में नहीं हैं। यह बात गुरुवार को धर्मशाला के पूर्व विधायक एवं पूर्व मंत्री किशन कपूर ने पत्रकार वार्ता के दौरान कही।


शहरी विकास मंत्री को धर्मशाला से नहीं बैजनाथ से लगाव

कपूर ने कहा कि शहरी विकास मंत्री को धर्मशाला से नहीं, बल्कि बैजनाथ से लगाव है। यदि सुधीर धर्मशाला के प्रति संवेदनशील होते तो नगर निगम में पदों को भरने को तत्परता दिखाते। उन्होंने नगर निगम धर्मशाला में कर्मचारियों की कमी को लेकर मोर्चा खोलते हुए कहा कि नगर निगम धर्मशाला में एक्सीईएन आईपीएच को एडीशनल चार्ज दिया गया है। एसडीओ की शिमला में पांच पोस्ट्स हैं, सुपरीडेंट 6 हैं जबकि धर्मशाला में सिर्फ एक हैं। शिमला नगर निगम में जहां 76 कलर्क काम कर रहे हैं वहीं धर्मशाला में मात्र 3 लोग यह काम देख रहे हैं। हेल्थ सुपरवाइजर भी शिमला में 9 हैं जबकि धर्मशाला में कोई नहीं है, सफाई कर्मचारी शिमला में 472 और धर्मशाला में 12 हैं। चीफ अकाउंट ऑफिसर शिमला में एक है और धर्मशाला में कोई नहीं। किशन कपूर ने कहा कि जहां तक उन्हें जानकारी मिली है वित्त विभाग ने भी धर्मशाला नगर निगम में पोस्ट्स सेंक्शन करने के लिए इंकार कर दिया है।

एक ही फर्म को बार-बार दिया जा रहा सफाई का ठेका

कपूर ने शहर की सफाई व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए कहा कि धर्मशाला नगर निगम द्वारा जिस दिल्ली की फर्म को सफाई का ठेका दिया गया है उसने तय शर्तों के अनुसार अभी 25 प्रतिशत कर्मचारी भी नहीं लगाए हैं। ऐसे में बार-बार एक ही फर्म को सफाई का ठेका देने की बात समझ से परे है। उन्होंने कहा कि आज सफाई न होने की वजह से धर्मशाला के साथ लगते क्षेत्रों में लोगों को डायरिया जैसी बीमारी से जूझना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पानी के स्त्रोत साफ नहीं है, अस्पताल में जब लोग अपना इलाज करवाने के लिए जाते हैं तो वहां डॉक्टर नहीं मिलते हैं। टेलीफोन के खंभों पर स्ट्रीट लाइट लगा दी गई है।

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