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बच्चा बदलने का मामला : अनिल-शीतल को मिलेगा लड़का

बच्चा बदलने का मामला : अनिल-शीतल को मिलेगा लड़का

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लेखराज धरटा/शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कमला नेहरू अस्पताल से बच्चा बदलने के मामले में डीएनए रिपोर्ट आने के बाद ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने दोनों अभिभावकों को निर्देश दिए हैं कि वे आपसी सहमति से बच्चों की अदला-बदली करें। शुक्रवार को चीफ जस्टिस मंसूर अहमद मीर व जस्टिस संदीप शर्मा की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने अदालत में मौजूद दोनों अभिभावकों को कहा कि मसले को खुद सुलझाएं। अब 27 अक्टूबर को मामले की अगली सुनवाई होगी। इससे पहले वे बच्चों की अदला-बदला कर लें। इस पर याचिकाकर्ता शीतल और उनके पति अनिल व प्रतिवादी पक्ष जितेंद्र और अंजना इस पर सहमत हो गए। शीतल ने बताया कि उन्होंने 26 अक्टूबर को घर पर धार्मिक कार्यक्रम रखा है, इसमें रीति-रिवाज के साथ वे बेटी लौटा कर अपना बेटा ले लेंगे। 27 अक्टूबर को कोर्ट इस मामले में केएनएच अस्पताल पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दे सकता है, चूंकि इसमें अस्पताल की ही लापरवाही सामने आई है।

  • हाईकोर्ट ने आपसी सहमति से बच्चे लौटाने के दिए निर्देश 
  • 26 को होगा बच्चों का आदान-प्रदान, 27 को अगली सुनवाई

knhबता दें कि शीतल ने आरोप लगाया है कि उसने 26 मई 2016 को केएनएच में बच्चे को जन्म दिया था। इसके तुरंत बाद नर्स ने उन्हें बताया कि उनके बेटा हुआ है। जबकि 20-25 मिनट बाद उन्हें बेटी थमा दी गई। शीतल का आरोप था  कि उनके बच्चे को बदला गया है। उन्होंने बेटे को ही जन्म दिया था। बता दें कि इस मामले की जांच हाल ही में कोर्ट ने एसपी शिमला को करने के आदेश दिए थे। मामले में 26 मई को बच्चों को जन्म देने वाले सभी माता-पिता का डीएनए कराया जा चुका है। इसमें ही बच्चा बदलने का खुलासा हुआ है।

 कब क्या हुआ

  • 26 मई को शिकायतकर्ता शीतल का प्रसव केएनएच अस्पताल में हुआ था। शिकायतकर्ता के साथ एक अन्य लड़की थी। उसे नर्स ने बताया कि शीतल के लड़का हुआ है। लेकिन कुछ देर बाद यह बताते हुए कि बिटिया हुई, उन्हें लड़की दे दी गई
  • 13 जून को शिकायतकर्ता ने बच्ची का डीएनए करवाया।
  •  28 जून को डीएनए रिपोर्ट आई, जो परिजनों से मेल नहीं खा रही थी।
  • 30 जून को परिजनों ने केएनएच प्रबंधन को लिखित में शिकायत की।
  • 13 जुलाई को परिजनों ने पुलिस अधीक्षक शिमला को शिकायत की।
  • 14 जुलाई को थाना प्रभारी छोटा शिमला ने मामले की जांच के लिए परिजनों को थाने में बुलाया।
  • 15 जुलाई को पुलिस की निगरानी डीएनए टेस्ट करवाया गया।
  • 28 जुलाई को रिपोर्ट पुलिस को सौपी गई।
  • 4 अगस्त को दोबारा पुलिस के पास शिकायत की गई ।
  • 27 अगस्त को छोटा शिमला ने बच्ची का डीएनए सैंपल लिया।
  • 9 सितंबर को रिपोर्ट जुन्गा फारेसिक लैब से प्राप्त हुई, जिसमें पुष्टि हुई कि बच्चे बदले गए है।

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